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अंडरवर्ल्ड सीक्रेट : खौफ के साम्राज्य का अंत, दशरथ रहाणे की अंडरवर्ल्ड कहानी

सूरज सिंह
मुंबई के अंडरवर्ल्ड की दुनिया में कई ऐसे नाम उभरे, जिन्होंने अपने खौफ और दुस्साहस से पूरे शहर को हिला कर रख दिया। इन्हीं में से एक नाम था दशरथ रहाणे का। गिरगांव का रहने वाला दशरथ रहाणे बेहद साहसी और निडर युवक माना जाता था। वह कुख्यात गैंगस्टर अमर नाईक का बेहद करीबी और भरोसेमंद साथी था, जिसे लोग उसका ‘ताबीज’ तक कहते थे।
दक्षिण मुंबई के दाक्षिणात्य (खासतौर पर शेट्टी) होटल मालिकों और चालकों के बीच दशरथ का ऐसा खौफ था कि उसका नाम सुनते ही लोग कांप उठते थे। बताया जाता है कि उसने अपने वर्चस्व को कायम करने के लिए एक के बाद एक करीब २२ हत्याएं कीं। इन घटनाओं ने उसे अंडरवर्ल्ड में तेजी से ऊपर पहुंचा दिया। उसमें ‘डॉन’ बनने के लगभग सभी गुण नजर आते थे -निर्दयता, रणनीति और बेखौफ अंदाज।
१९८५ से १९९० के बीच दशरथ रहाणे ने दक्षिण मुंबई के होटल कारोबारियों के बीच अपना जबरदस्त दबदब्ाा बना लिया था। उसके नाम से उगाही, धमकी और खौफ का एक ऐसा तंत्र खड़ा हो गया था, जिससे कोई भी आसानी से बच नहीं पाता था। लेकिन अंडरवर्ल्ड की दुनिया में जितनी तेजी से कोई ऊपर उठता है, उतनी ही जल्दी उसका पतन भी हो सकता है।
दशरथ के बढ़ते प्रभाव से उसके दुश्मनों की संख्या भी बढ़ती जा रही थी। इसी दौरान शेट्टी होटल मालिकों ने उसके खिलाफ मोर्चा खोल दिया और उसे खत्म करने के लिए सुपारी दे दी। इस काम के लिए छोटा राजन गैंग के करीब ४० गुंडों को लगाया गया।
१९ अक्टूबर १९९० का दिन दशरथ रहाणे के जीवन का आखिरी दिन साबित हुआ। लालबाग इलाके में उसे घेरकर बेरहमी से मार डाला गया। यह हमला इतना योजनाबद्ध और अचानक था कि दशरथ को संभलने का मौका तक नहीं मिला।
इस तरह महज पांच साल के भीतर ही अंडरवर्ल्ड में तेजी से उभरा एक खतरनाक नाम हमेशा के लिए खत्म हो गया। दशरथ रहाणे की कहानी यह दिखाती है कि अपराध की दुनिया में सत्ता और डर भले ही जल्दी मिल जाए, लेकिन उसका अंत अक्सर उतना ही हिंसक और अचानक होता है।

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