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पुलिसिया भ्रष्टाचार रोक पाने में गृह विभाग नाकाम… फडणवीस के गढ़ में पुलिस की ‘महाभारत’!

– `२५० करोड़ के साइबर प्रâॉड में दर्जनों पुलिसकर्मी शामिल

-सट्टा-हवाला कनेक्शन से पुलिस महकमे में भूचाल, ९ निलंबित

सुनील ओसवाल / मुंबई

गृहमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सबसे मजबूत राजनीतिक गढ़ नागपुर में ही साइबर पुलिस की ‘महाभारत’ उजागर होने से महाराष्ट्र पुलिस की साख पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। आंतरिक गुटबाजी, जांच में गंभीर लापरवाही, करोड़ों के हवाला-सट्टा नेटवर्क और अधिकारियों के बीच टकराव के आरोपों के बाद पुलिस निरीक्षक समेत ९ कर्मियों को निलंबित कर दिया गया।
राज्य में साइबर अपराधों पर ‘जीरो टॉलरेंस’ का दावा करने वाली सरकार के लिए यह मामला इसलिए भी असहज माना जा रहा है, क्योंकि पूरा घटनाक्रम उसी नागपुर में सामने आया है, जिसे फडणवीस का राजनीतिक किला माना जाता है। मामले की शुरुआत कारोबारी हिरेन भोजवानी की शिकायत से हुई। शिकायत के बाद साइबर पुलिस की टीम पुणे पहुंची और १४ लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की। जांच में ‘एकांश’ नामक बुकी के जरिए ४० से अधिक बैंक खातों से करीब २५० करोड़ रुपए के हवाला और क्रिकेट सट्टेबाजी से जुड़े लेन-देन का खुलासा हुआ, लेकिन चौंकाने वाली बात यह रही कि इतनी बड़ी आर्थिक अनियमितता सामने आने के बावजूद आरोपी को सिर्फ नोटिस देकर छोड़ दिया गया। बाद में आरोपी फरार हो गया। इसी के बाद पुलिस विभाग के भीतर ही बगावत शुरू हो गई। एक गुट ने पूरे मामले की जानकारी सोशल मीडिया पर वायरल कर दी, जिससे साइबर पुलिस थाने का अंदरूनी संघर्ष सार्वजनिक हो गया।
पुलिस थाने में मारपीट
साइबर थाने में अधिकारी एक-दूसरे के मामलों में हस्तक्षेप कर रहे थे। जांच को लेकर टकराव इतना बढ़ गया कि मामला कथित मारपीट तक पहुंच गया। इसके बाद पुलिस आयुक्त डॉ. रवींद्र कुमार सिंगल ने तत्काल हस्तक्षेप करते हुए विभागीय जांच के आदेश दिए। जांच प्रभावित न हो, इसलिए वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक समेत छह हवलदारों को निलंबित कर दिया गया।

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