मुख्यपृष्ठनए समाचारमनपा की लापरवाही फिर से डूबेगी मुंबई!

मनपा की लापरवाही फिर से डूबेगी मुंबई!

-अब तक सिर्फ ३९ प्रतिशत काम

सड़कों पर कीचड़, जलभराव का खतरा बरकरार

द्रुप्ति झा / मुंबई

२०२६ के मानसून से पहले मुंबई के नाला सफाई कार्यों को लेकर मनपा के दावों और हकीकत पर चिंताएं जताई जा रही हैं। बता दें की नाला सफाई का पूरा काम करने के लिए ३१ मई २०२६ की समयसीमा तय की गई है, लेकिन हर बार की तरह इस बार भी मनपा का काम धीमी गति से चल रहा है, जिस वजह से इस मानसून में भी लोगों को जलभराव जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। बता दें कि मनपा द्वारा किए जा रहे मानसून-पूर्व नाला और गटर सफाई का काम ५०³ भी नहीं हुआ है। अब तक सिर्फ ३९³ नाला सफाई का काम हुआ है, जिसमें से बड़े नालों की सफाई लगभग २५.८३³ तक ही पूरी हुई है। हालांकि १५ मई २०२६ तक ८०³ से अधिक नाला सफाई पूरी करने का कड़ा निर्देश दिया गया है, लेकिन धीमी गति के कारण यह लक्ष्य हासिल होना मुश्किल लग रहा है। अक्सर नाला सफाई के बाद कीचड़ को वहीं पर ही छोड़ दिया जाता है, जिसको लेकर भी लोगों की शिकायत है। नाला सफाई अभियान के तहत अंधेरी, विले पार्ले और दादर जैसी जगहों पर साफ किए गए नालों से निकला कचरा नाले के किनारों पर ही छोड़ दिया गया है, जो बारिश में फिर से नालों में जा सकता है।
नाले साफ न होने से मानसून में जलभराव, घरों में गंदा पानी घुसना और बीमारियों का पैâलना आम समस्या बन जाता है। समय पर सफाई न होने से कचरा जमा हो जाता है, जिससे बारिश के पानी की निकासी नहीं हो पाती। रुके हुए गंदे पानी और नालियों में कूड़ा-कचरा होने से मच्छरों की संख्या बढ़ जाती है, जिससे डेंगू, चिकनगुनिया और हैजा जैसी जानलेवा बीमारियां पैâलती हैं। जलजमाव के कारण सड़कों पर यातायात प्रभावित होता है और लोगों को आवागमन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

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