सूफी खान
ट्रंप कह रहे हैं कि ईरान से बातचीत अच्छी चल रही है, लेकिन ईरान ने किसी भी प्रतिक्रिया से इंकार किया है। ईरान की पार्लियामेंट के स्पीकर और ईरान की तरफ से इस्लामबाद में अमेरिका से बात करने वाले मोहम्मद बाघेर कालिबाफ ने साफ कह दिया है कि अमेरिका आर्थिक दबाव, नौसैनिक घेराबंदी और मीडिया के जरिये हमारे देश को झुकाने की कोशिश कर रहा है। उनका आरोप है कि इन तरीकों से देश की एकता को कमजोर कर ईरान को सरेंडर करने पर मजबूर किया जा रहा है। मोहम्मद बाघेर कालिबाफ ने ये तक लिख दिया कि ‘अब ऑपरेशन ट्रस्ट मी ब्रो खत्म हो चुका है और ऑपरेशन फॉक्सियस शुरू हो चुका है।’ कुछ जानकार तो ये भी कहते हैं कि सिर्फ तेल की कीमतों को गिराने के लिए अमेरिका ने बातचीत का ये नया शिगूफा छोड़ा है और ४८ घंटे में समझौते की बात जोर देकर कही जा रही है। इस खबर का असर सीधे ग्लोबल मार्वेâट पर पड़ा। कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिली और ब्रेंट क्रूड करीब ११ज्ञ् तक गिर गया। क्या ये अमेरिका की चाल हो सकती है या वाकई वो किसी डील को लेकर गंभीर है।
बहरहाल, अमेरिका ने कहा है कि ईरान कुछ घंटो बाद डील के लिए उनके साथ टेबल पर होगा। शुरू में तीन अहम मुद्दों पर चर्चा होगी और अगर इन पर दोनों सहमत हो जाते हैं तो अगले ३० दिनों तक विस्तृत बातचीत होगी। देखा जाए तो प्रेसिडेंट ट्रंप की जल्दबाजी और ईरान के सख्त तेवर बता रहे हैं कि अमेरिका ईरान के बीच डील इतनी आसान नहीं होगी। जितना अमेरिकी मीडिया दिखाने की कोशिश कर रहा है।
उस पर से ट्रंप का ये लहजा कि वो युद्ध खत्म होते देखना चाहते हैं, साथ में चेतावनी भी कि अगर ईरान अमेरिकी शर्तें नहीं मानता, तो हमले और तेज किए जा सकते हैं। ईरान इसे अमेरिका की विश लिस्ट बता रहा है यानी अमेरिकी मनमर्जी की बातें। एक्सपर्ट कहते हैं कि यूरेनियम १ पर्सेंट हो या ९९ पर्सेंट तक, ईरान को एनरिच करने के राइट्स नहीं छोड़ने चाहिए, चाहे कुछ भी हो जाए। एनरिच यूरेनियम का क्या करना है सिर्फ बात इस पर ही होनी चाहिए, इसी तरह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर से कब्जा किसी भी हालत में ईरान नहीं छोड़ेगा और ना ही उसे छोड़ना चाहिए। बल्कि वहां से टोल वसूलने का बंदोबस्त ़वैâसे बनाया जाए। इस पर बात होनी चाहिए।
