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अवैध रूप से पानी आपूर्ति पर कुंभकर्णी नींद से जागा राजस्व विभाग …३ टैंकर मालिकों के खिलाफ मामला दर्ज

सुरेश गोलानी / मुंबई
कई दिनों की विस्तृत ग्राउंड रिसर्च के बाद `दोपहर का सामना’ ने हाल ही में बिना गुणवत्ता जांच के पानी आपूर्ति के कारण नागरिकों के स्वास्थ्य पर होने वाले दुष्परिणाम और भूजल स्तर (ग्राउंडवाटर लेवल) गिराने वाले जिम्मेदार टैंकर संचालकों के बारे में खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। खबर का संज्ञान लेते हुए राजस्व विभाग आखिरकार अपनी कुंभकर्णी नींद से जागा और टैंकरों के माध्यम से अवैध रूप से पानी आपूर्ति करने वाले तीन कंपनी मालिकों के खिलाफ नवघर पुलिस थाने में महाराष्ट्र भूजल (विकास एवं प्रबंधन) अधिनियम-२००९ की धारा ५२ के तहत बोरवेल, तालाब, झील जैसे प्रतिबंधित स्त्रोतों से अवैध तरीके से पानी निकाल कर बेचने के आरोप में मामला दर्ज किया है।

नियमों के उल्लंघन पर सजा का प्रावधान
इस धारा के तहत यदि कोई व्यक्ति अधिनियम, नियमों या जिला प्राधिकरण के आदेशों का उल्लंघन करता है तो उसे ६ महीने तक की वैâद, १०,००० से २५,००० रुपए तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। उल्लंघन जारी रहने पर ५०० रुपए प्रतिदिन का अतिरिक्त जुर्माना भी लग सकता है।
आरोपियों की पहचान
आरोपियों की पहचान जयंत म्हात्रे (नेहा वॉटर सप्लायर), नवनाथ पाटील (राम वॉटर सप्लायर) और गणेश गुप्ता (गणेश वॉटर सप्लायर) के रूप में हुई है। इन तीनों की पानी सप्लाई कंपनियों के कार्यालय भायंदर- पूर्व के गोड़देव और नवघर गांव में स्थित है। अपर तहसीलदार कार्यालय से जुड़े ग्राम राजस्व अधिकारी तुषार खेडकर द्वारा की गई लिखित शिकायत मिलने के बाद नवघर पुलिस ने मामला दर्ज किया है।
गुणवत्ता पर संचालक का ध्यान नहीं
ज्ञात हो कि शहरों और ग्रामीण इलाकों में पानी की कमी के दौरान निजी टैंकर संचालक पानी के मुख्य स्रोत के रूप में अवैध बोरवेल, तालाब और कभी-कभी निजी कुओं का उपयोग करते हैं, जो अक्सर गंदे या प्रदूषित पानी और भूजल स्तर गिरने का मुख्य कारण भी बनते हैं। महाराष्ट्र महानगरपालिका अधिनियम के तहत मनपा प्रशासन और राजस्व विभाग की यह जिम्मेदारी है कि पीने के पानी की सुरक्षा और स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए निजी और मनपा के टैंकरों पर सख्त गुणवत्ता नियंत्रण लागू करे, जिसमें अनिवार्य लाइसेंसिंग, गुणवत्ता परीक्षण प्रणाली स्रोत ट्रैकिंग और पंजीकरण शामिल है। लेकिन आश्चर्यचकित करने वाली बात यह है कि मीरा-भायंदर महानगरपालिका से जुड़े जल आपूर्ति विभाग और राजस्व प्रशासन के पास सैकड़ों की संख्या में चल रहे अनियंत्रित निजी टैंकरों का न तो कोई डेटा (आंकड़े) है और न ही रजिस्ट्रेशन, स्त्रोत और पानी की मात्रा तथा गुणवत्ता परीक्षण करने की कोई प्रणाली।

 

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