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डेथ बेड पर ‘डिजिटल जनगणना’! …‘ऑनलाइन सिस्टम फेल, डेटा गायब

घंटों की मशक्कत के बाद भी जनता को कामयाबी नहीं

सुनील ओसवाल / मुंबई
देश को डिजिटल बनाने के बड़े-बड़े दावों के बीच महाराष्ट्र में शुरू हुई ऑनलाइन स्वगणना प्रक्रिया अब सरकार के लिए ही मुश्किल बनती जा रही है। यह डिजिटल जनगणना एक तरह से ‘डेथ बेड’ पर पहुंच गई है। जनगणना के लिए शुरू किए गए पोर्टल और मोबाइल ऐप की तकनीकी खामियों ने लाखों नागरिकों को परेशान कर दिया है। कहीं ओटीपी नहीं आ रहा, कहीं सर्वर बैठ जा रहा है तो कहीं पूरी जानकारी भरने के बाद डेटा गायब हो जा रहा है। सरकार का उद्देश्य था कि नागरिक घर बैठे खुद अपनी और परिवार की जानकारी ऑनलाइन भर सकें, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट दिखाई दे रही है। परिवार प्रमुख घंटों मोबाइल और लैपटॉप के सामने बैठकर जानकारी भर रहे हैं, मगर आखिरी चरण में ‘एरर’ दिखने से सारी मेहनत बेकार हो रही है।
हेल्पलाइन बनी मजाक?
तकनीकी समस्याओं के समाधान के लिए जारी हेल्पलाइन नंबर भी लोगों के किसी काम नहीं आ रहे। शिकायतों के बावजूद जवाब नहीं मिलने से लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। कई नागरिकों ने सवाल उठाया है कि जब सिस्टम तैयार नहीं था तो इतनी जल्दबाजी में ऑनलाइन प्रक्रिया क्यों शुरू की गई? इस मुद्दे को लेकर अब सरकार की डिजिटल व्यवस्था पर सवाल खड़े होने लगे हैं। विपक्षी दलों का कहना है कि जनता को सुविधा देने के नाम पर उसे तकनीकी जाल में फंसाया जा रहा है।

सबमिट’ दबाते ही सिस्टम डाउन
नागरिकों का आरोप है कि पूरा फॉर्म भरने के बाद जैसे ही ‘सबमिट’ या ‘सेव’ बटन दबाया जाता है, पोर्टल अचानक बंद हो जाता है। कई मामलों में सिस्टम ऑटो-लॉगआउट हो रहा है, जिससे लोगों को पूरी प्रक्रिया फिर से करनी पड़ रही है। ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट की कमजोर स्थिति ने मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। धीमे नेटवर्क के कारण नक्शा लोड नहीं हो रहा और जीपीएस लोकेशन फाइनल नहीं हो पा रही। लोकेशन फाइनल हुए बिना फॉर्म आगे नहीं बढ़ रहा, जिससे लोग घंटों फंसे रह रहे हैं।

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