मुख्यपृष्ठनए समाचारडोनाल्ड ट्रंप करवाते हैं खुद पर फर्जी हमले!

डोनाल्ड ट्रंप करवाते हैं खुद पर फर्जी हमले!

-नए सर्वे में अमेरिकियों की राय रिपब्लिकनों ने भी जताया शक

सामना संवाददाता / मुंबई

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर हुए विभिन्न हमलों को लेकर अमेरिकी जनता के बीच बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। कई अमेरिकी नागरिक इन घटनाओं की सच्चाई पर सवाल उठा रहे हैं। न्यूजगार्ड और यूगव द्वारा संयुक्त रूप से किए गए एक सर्वे में सामने आया कि बड़ी संख्या में लोगों का मानना है कि ट्रंप पर हुए कुछ हमले या तो पूरी तरह फर्जी थे या फिर किसी खास मकसद से पहले से योजनाबद्ध तरीके से कराए गए थे। यानी इसका मतलब तो यही है कि ट्रंप ने अपने ऊपर खुद ये हमले प्लांट करवाए थे।
बता दें कि यह सर्वे २८ अप्रैल से ४ मई के बीच किया गया, जिसमें अमेरिकियों से इन चर्चित सुरक्षा घटनाओं पर उनकी राय पूछी गई। ११ मई को जारी रिपोर्ट में बताया गया कि अधिकांश अमेरिकियों को लगता है कि ट्रंप पर हाल में हुए तीन हमलों में से कम से कम एक हमला फर्जी या पहले से रचा गया था। सर्वे के दौरान लोगों से हाल की कई घटनाओं के बारे में सवाल पूछे गए, जिनमें अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से जुड़ी घटना भी शामिल थी। सर्वे के अनुसार, २४ प्रतिशत लोगों ने साफ तौर पर कहा कि यह हमला फर्जी था, जबकि ४५ प्रतिशत लोगों ने इसे वास्तविक माना। वहीं करीब ३२ प्रतिशत लोग इस मामले पर कोई स्पष्ट राय नहीं दे सके और असमंजस की स्थिति में रहे।
सर्वे में रिपब्लिकन और डेमोक्रेट समर्थकों के बीच बड़ा वैचारिक अंतर भी सामने आया। आंकड़ों के अनुसार, खुद को डेमोक्रेट मानने वाले करीब ३३ प्रतिशत लोगों ने ट्रंप पर हुए हमले को फर्जी बताया, जबकि रिपब्लिकन समर्थकों में केवल ८ प्रतिशत लोग ही इस तरह का शक जताते हैं। न्यूजगार्ड की संपादक सोफिया रूबिन्सन ने कहा कि यह सर्वे साफ दिखाता है कि सरकार और मीडिया संस्थानों पर जनता का भरोसा पहले की तुलना में काफी कम हो गया है। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि १८ से २९ वर्ष की उम्र के युवा अन्य आयु वर्गों की तुलना में ज्यादा मानते हैं कि ट्रंप पर हुए हमले पहले से तय या योजनाबद्ध थे।
२४ फीसदी ने फर्जी माना
इन घटनाओं में सबसे गंभीर हमला जुलाई २०२४ में पेंसिल्वेनिया के बटलर शहर में चुनावी रैली के दौरान हुआ था। उस समय ट्रंप भाषण दे रहे थे, तभी एक गोली उनके कान को छूते हुए निकल गई थी। इस हमले में रैली में मौजूद एक व्यक्ति की मौत भी हो गई थी। एफबीआई ने हमलावर की पहचान २० वर्षीय थॉमस मैथ्यू क्रूक्स के रूप में की थी, जिसे बाद में सीक्रेट सर्विस एजेंटों ने मौके पर ही मार गिराया था। सर्वे के मुताबिक, २४ प्रतिशत लोगों ने पेंसिल्वेनिया की इस घटना को भी फर्जी माना।

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