सुनील ओसवाल / मुंबई
मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के राजनीतिक गढ़ ठाणे में बड़ा सियासी विस्फोट हुआ है। शिंदे गुट के ९ नगरसेवकों के खिलाफ कोर्ट में फर्जीवाड़े का दावा किया गया है। इसके बाद ठाणे मनपा की राजनीति गरमा गई है। आरोप है कि इन नगरसेवकों ने चुनाव के दौरान दाखिल किए गए शपथपत्रों में संपत्ति और आर्थिक जानकारी गलत दी, कई तथ्य छुपाए और कथित अवैध निर्माणों का खुलासा नहीं किया। इस मामले को लेकर दाखिल इलेक्शन रिट पिटीशन ने शिंदे गुट की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
एडवोकेट रोहिदास मुंडे ने दावा किया है कि मतदाताओं को गुमराह करने वाली जानकारी चुनाव आयोग के समक्ष पेश की गई, जो जनप्रतिनिधित्व कानून का गंभीर उल्लंघन है। जिन नगरसेवकों पर सवाल उठे हैं उनमें रमाकांत मढवी, शैलेश पाटील, आदेश भगत, दीपक जाधव, साक्षी मढवी, दर्शना म्हात्रे, अर्चना पाटील, दिपाली भगत और स्नेहा पाटील के नाम शामिल हैं। याचिका में आरोप लगाया गया है कि कई नगरसेवकों ने अपनी वास्तविक संपत्तियों और कथित अनधिकृत निर्माणों को हलफनामे में छुपाया है। इस पूरे घटनाक्रम ने ठाणे की राजनीति में भूचाल ला दिया है। विपक्ष अब इसे ‘सत्ता के संरक्षण में सच छुपाने का मामला’ बता रहा है। महापौर शर्मिला गायकवाड ने मामले के न्यायालय में होने का हवाला देते हुए टिप्पणी करने से बचने की कोशिश की।
सदस्यता रद्द होने की नौबत
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यदि अदालत में आरोप साबित होते हैं तो संबंधित नगरसेवकों की सदस्यता रद्द होने तक की नौबत आ सकती है। ऐसे में ठाणे महानगरपालिका में शिंदे गुट की ताकत पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। चुनाव खत्म होने के कुछ ही समय बाद सामने आए इस विवाद ने शिंदे गुट की साख पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
