सामना संवाददाता / मुंबई
भारत में डेटिंग अब “कूल” नहीं, “रियल” हो गई है। “देखते हैं आगे क्या होता है” वाला दौर धीरे-धीरे जा रहा है और उसकी जगह ले रहा है “मुझे पता है मुझे क्या चाहिए, और मैं इसे जाहिर करने से नहीं डरता।” टिंडर के ईयर इन स्वाइप™ 2025 के मुताबिक, युवा सिंगल्स अब अनिश्चितता से दूर हो रहे हैं और स्पष्टता को अपना रहे हैं। 64% का कहना है कि डेटिंग में सबसे ज्यादा जरूरत भावनात्मक ईमानदारी की है, जबकि 73% कहते हैं कि उन्हें तब पता चलता है कि वे किसी को पसंद करते हैं, जब वे उसके साथ पूरी तरह खुद हो सकते हैं। न कोई अटकलें, न कोई उलझे हुए संकेत, बस ऐसे वाइब्स जो सच में समझ में आएं।
और लोग वो वाइब्स कैसे ढूंढ रहे हैं? यह अब बहुत ज्यादा निजी होता जा रहा है। स्टार साइन्स अब सबकी जुबान पर हैं। चाहे “सिर्फ वाटर साइन्स को ही मौका” हो या बस अपनी राशि शेयर करना, ज्योतिष युवा सिंगल्स के लिए अपनी पर्सनालिटी जाहिर करने, कम्पैटिबिलिटी समझने और ज्यादा मतलब की बातचीत शुरू करने का एक मजेदार तरीका बन गया है।
टिंडर इंडिया की रिलेशनशिप एक्सपर्ट डॉ. चांदनी तुगनैत इस बदलाव को किसी गहरी बात का हिस्सा मानती हैं। उन्होंने कहा, “लोगों में आत्म-जागरूकता बढ़ रही है। थेरेपी, अटैचमेंट स्टाइल्स और बाउंड्रीज जैसे विषयों पर बातचीत के ज्यादा मौके मिलने से युवा अब डेटिंग के बारे में ज्यादा सोच-समझकर फैसले ले रहे हैं। वे ऐसे रिश्तों में वक्त और एनर्जी लगाने को तैयार नहीं जो उन्हें बेमेल लगते हैं।”
इसी बदलाव को भांपते हुए टिंडर का एस्ट्रोलॉजी मोड ठीक इसी तरह की डेटिंग एनर्जी के लिए बनाया गया है, जहां कम्पैटिबिलिटी सिर्फ शक्ल-सूरत या एक-लाइनर्स की बात नहीं, बल्कि ऐसे व्यक्तित्वों की बात है जो एक-दूसरे से मेल खाते हों और जहां कनेक्शन शुरू से ही सही लगे।
