नीट-यूजी २०२६ पेपर लीक मामले ने देश की परीक्षा व्यवस्था पर फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सीबीआई ने इस मामले में जांच तेज करते हुए दो और आरोपियों की गिरफ्तारी की थी, जिसके बाद गिरफ्तारियों की संख्या सात तक पहुंची। बाद में जांच का दायरा महाराष्ट्र के लातूर तक पैâल गया, जहां रेणुका केमिस्ट्री क्लासेस से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी की गई। रिपोर्टों के अनुसार, नीट-यूजी २०२६ परीक्षा ३ मई को हुई थी और कथित पेपर लीक के बाद इसे रद्द कर २१ जून को दोबारा कराने की घोषणा की गई। इसी बीच लखनऊ विश्वविद्यालय में भी परीक्षा की शुचिता पर सवाल उठे। बीएससी छात्रा से बातचीत का ऑडियो वायरल होने के बाद जूलॉजी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. परमजीत सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। पुलिस ने उनके लैपटॉप, मोबाइल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त कर चैंबर सील कर दिया है। लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों से छात्रों और अभिभावकों में रोष है। सवाल केवल एक परीक्षा का नहीं, बल्कि पूरी शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता का है।
