मुख्यपृष्ठनए समाचारपॉलिटिका: गरीब की जोरू और परमाणु का रायता

पॉलिटिका: गरीब की जोरू और परमाणु का रायता

मनमोहन सिंह

दुनिया के नक्शे को ध्यान से देखें, तो समझ आता है कि यहां हर कोई अपनी-अपनी डफली, अपना-अपना राग अलापने में मस्त है। इस वैश्विक अखाड़े में सबसे बड़े पहलवान बने घूमते हैं हमारे `सैम अंकल’ यानी अमेरिकी प्रेसिडेंट ट्रंप। अमेरिका का हाल ऐसा है कि मान न मान, मैं तेरा मेहमान। दुनिया में कहीं भी पत्ता हिले, अंकल तुरंत एवेंजर्स की पोशाक सिलवाने दर्जी के पास दौड़ पड़ते हैं। अब ईरान को ही देख लीजिए। ईरान बेचारा अपने कोने में बैठा था, लेकिन अमेरिका और उसके यार इजरायल को लगा कि ईरान के पास परमाणु बम होना यानी दुनिया का विनाश! सो, दोनों राशन-पानी लेकर उसके पीछे पड़ गए। नतीजा? ईरान पर तो प्रतिबंध लगे सो लगे, पर गेहूं के साथ घुन भी पिसता है वाली कहावत सच हो गई। वैश्विक तनाव के कारण तेल के दाम बढ़े और मायानगरी मुंबई में आम आदमी का वड़ा पाव भी बजट से बाहर हो गया। यानी करे कोई, भरे कोई।
वैसे, जब परमाणु हथियारों की बात आती है, तो अमेरिका की दूरबीन में मोतियाबिंद आ जाता है। बगल में पाकिस्तान परमाणु बम का झोला लटकाए बगल में छुरी, मुंह में राम कर रहा है, पर अमेरिका वहां धृतराष्ट्र बन जाता है। हिलेरी मैडम ने ठीक ही कहा था कि आस्तीन में सांप पालोगे तो वो डसेगा ही। लेकिन साहब, पाकिस्तान तो ऐसा आस्तीन का सांप निकला जो अब खुद अपने पालने वाले को ही काटने दौड़ रहा है। खैर, उसे तो दुनिया के नशे यानी कर्ज की ऐसी लत है कि वो खुद ही अपनी मौत मर रहा है। अब बात मुद्दे की, बात रूस की, तो पुतिन भाई साहब तो अमेरिका को सरेआम ठेंगा दिखाते हैं। अमेरिका दुनिया भर को डराता फिरता है, लेकिन जब पुतिन की बात आती है, तो अमेरिका की सारी हेकड़ी धरी की धरी रह जाती है। भले ही सीआईए ने कभी चालें चलकर सोवियत संघ के टुकड़े-टुकड़े कर दिए हों, लेकिन पुतिन ने रूस की चौधराहट को फिर से ऐसा कायम किया है कि वे जो चाहते हैं, वही करते हैं। अमेरिका और नाटो मिलकर भी उनका कुछ नहीं बिगाड़ पा रहे हैं। अब पुतिन भाई साहब ने अमेरिका और उसकी पाबंदियों को धता बताते हुए दुनिया को दिन में तारे दिखाने का नया पैंतरा चला है। उन्होंने खुलेआम अपने परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए अपने छोटे भाई बेलारूस को गोद में बिठाया और उसके कंधे पर परमाणु मिसाइलें रख दीं। इसे कहते हैं दूसरे के कंधे पर बंदूक रखकर चलाना।
बेलारूस के सैनिकों को ऐसी गुप्त ट्रेनिंग दी जा रही है जैसे कोई चोरी-छिपे गुलछर्रे उड़ा रहा हो। पर भाई साहब, इश्क और मुश्क छिपाए नहीं छिपता। रॉयटर्स ने भंडाफोड़ कर ही दिया। रूस के पास सरमत और यार्स जैसी मिसाइलें हैं जिनकी रेंज ३५ हजार किलोमीटर बताई जा रही है। पहले पुतिन ने कहा था कि बेलारूस सिर्फ दुकान देगा, सामान यानी परमाणु नियंत्रण रूस का रहेगा। लेकिन अब बेलारूसी जवानों को ट्रेनिंग देकर पुतिन ने साफ कर दिया है कि वे किसी के बाप से नहीं डरते। कुल मिलाकर बात वहीं आकर टिकती है अपने देश की एक पुरानी कहावत पर `गरीब की जोरू, गांव की भौजाई।’ ईरान कमजोर है, तो अमेरिका उस पर धौंस जमा रहा है। पाकिस्तान कंगाल है, तो सब उसे दुत्कार रहे हैं। लेकिन रूस बिंदास अमेरिका जैसे बड़े चौधरी को धता बताकर वही करने जा रहे है जिससे सैम अंकल को परेशानी है!

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