मुख्यपृष्ठस्तंभफलसफा : पीछे रह जाना भी जरूरी होता है

फलसफा : पीछे रह जाना भी जरूरी होता है

सना खान

आज हर कोई आगे निकलना चाहता है। सबको जल्दी है – जल्दी पैसा, जल्दी सफलता, जल्दी पहचान और जल्दी ‘सब कुछ’ पाने की। लेकिन इस जल्दबाजी में लोग सिर्फ दौड़ना सीख रहे हैं, रुककर जीना नहीं। सुबह आंख खुलते ही इंसान अपनी जिंदगी नहीं, दूसरों की जिंदगी देखने लगता है। किसी की नई नौकरी, किसी की सगाई, किसी की विदेश यात्रा, किसी की आलीशान जिंदगी और फिर धीरे-धीरे उसे अपनी ही जिंदगी अधूरी लगने लगती है। सामाजिक माध्यमों ने इंसान को जुड़ा हुआ कम और परेशान ज्यादा कर दिया है। अब लोग खुशियां महसूस कम करते हैं, दिखाते ज्यादा हैं। हर किसी को डर है कि कहीं वह पीछे न रह जाए। पीछे दोस्तों से, पीछे रिश्तेदारों से, पीछे समाज से और कभी-कभी अपने ही बनाए हुए मापदंडों से। लेकिन सबसे दुखद बात यह है कि इस दौड़ में इंसान खुद से ही दूर होता जा रहा है। धीरे-धीरे वह अपनी असली पसंद भूल जाता है। उसे यह तक समझ नहीं आता कि जो सपना वह पूरा करना चाहता है, वह सच में उसका अपना सपना है या सिर्फ दुनिया को दिखाने की चाह। कई लोग पूरी जिंदगी दूसरों जैसा बनने में निकाल देते हैं। फिर एक दिन अकेले बैठकर एहसास होता है कि उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी दूसरों की उम्मीदें पूरी करने में गुजार दी, खुद की खुशी ढूंढने में नहीं।
लेकिन सच यह है कि हर इंसान की कहानी अलग होती है। किसी को मंजिल जल्दी मिल जाती है, तो किसी को रास्ता समझने में वक्त लगता है। और देर से मिलने वाली चीजें अक्सर ज्यादा मजबूत, गहरी और सच्ची होती हैं। हर बार आगे निकलना जीत नहीं होती। कभी-कभी पीछे रह जाना भी जरूरी होता है, ताकि इंसान थोड़ा रुक सके, खुद को सुन सके, अपने सपनों को पहचान सके और यह समझ सके कि उसे सच में चाहिए क्या। जो पेड़ धीरे-धीरे बढ़ता है, उसकी जड़ें सबसे मजबूत होती हैं। और जो इंसान संघर्ष देखकर आगे बढ़ता है, उसकी सोच सबसे गहरी होती है। इसलिए अगर आपकी जिंदगी की रफ्तार दूसरों से धीमी है, तो खुद को कमजोर मत समझिए। हर चीज का अपना समय होता है। कुछ लोग जल्दी चमक जाते हैं, लेकिन जल्दी बुझ भी जाते हैं। और कुछ लोग देर से पहचान बनाते हैं, मगर हमेशा याद रखे जाते हैं। कुछ कहानियां देर से शुरू होती हैं, लेकिन सबसे खूबसूरत वही बनती हैं। क्योंकि जिंदगी में सिर्फ आगे निकलना जरूरी नहीं होता, कभी-कभी खुद को खोने से बचाना भी जरूरी होता है।
और सच कहें तो हर इंसान अपनी जिंदगी में कहीं न कहीं थोड़ा पीछे चल रहा होता है। बस फर्क इतना है कि कुछ लोग इस सफर को समझ लेते हैं और कुछ पूरी जिंदगी दूसरों की रफ्तार देखकर अपने ही कदमों से नफरत करने लगते हैं। शायद इस बात को कुछ पंक्तियों में सबसे बेहतर समझा जा सकता है –
हर चमकता हुआ चेहरा,
अंदर से रोशन हो यह जरूरी नहीं,
कुछ लोग हंसते सिर्फ इसलिए हैं, ताकि उनके आंसू दिखाई न दें कहीं।
मंजिलें तो मिल जाती हैं अक्सर,
मगर दिल अंदर से टूट जाता है,
हर चमकती हुई जिंदगी में,
कोई दर्द चुपके से छिप जाता है।

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