अनिल मिश्र / पटना
बिहार के गया जिले के टिकारी प्रखंड स्थित चितौखर गांव में एक आहर (पानी जमा होने का क्षेत्र अथवा तालाब) की उड़ाही के दौरान एक अद्भुत एवं अत्यंत दुर्लभ मूर्ति प्राप्त हुई है। इसे पालकालीन दुर्लभ पंचायतन शिवलिंग बताया जा रहा है। एक ही पाषाण पर शिव, विष्णु, नृत्य मुद्रा में गणेश तथा ईरानी शैली के वस्त्र पहने सूर्य देव की प्रतिमाएं उकेरी गई हैं।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के मूर्ति वैज्ञानिक डॉ. जलज कुमार तिवारी के अनुसार, यह एक “पंचायतन शिवलिंग” है, जो संभवतः पालकालीन हो सकता है। इस शिवलिंग के चारों ओर भगवान विष्णु, सूर्य देव, नृत्य मुद्रा में श्रीगणेश और चतुर्भुज शिव की आकृतियां अत्यंत सुंदर ढंग से उकेरी गई हैं। इस शिवलिंग में ईरानी शैली की झलक भी दिखाई देती है।
मूर्ति में सूर्य देव को हार, ईरानी शैली के वस्त्र एवं जूते पहने हुए दर्शाया गया है। उनके दोनों ओर सहचर दंड और पिंगल की आकृतियां भी बनी हुई हैं। वहीं भगवान विष्णु के चारों हाथ नीचे की ओर शंख पुरुष और चक्र पुरुष के सिर पर दर्शाए गए हैं, जबकि दूसरी ओर चतुर्भुज शिव की प्रतिमा उत्कीर्ण है। यह प्रतिमा भारत की गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत का प्रमाण मानी जा रही है।
बताया जाता है कि टिकारी प्रखंड अंतर्गत चितौखर गांव में आहर की उड़ाही के दौरान इस प्राचीन शिव प्रतिमा के मिलने से पूरे क्षेत्र में उत्साह, श्रद्धा और कौतूहल का वातावरण बन गया। आहर की सफाई एवं मिट्टी निकासी का कार्य चल रहा था, तभी मिट्टी के भीतर से पत्थर निर्मित शिवलिंग युक्त प्रतिमा प्राप्त हुई।
प्रतिमा मिलने की सूचना फैलते ही आसपास के ग्रामीणों की भारी भीड़ घटनास्थल पर जुट गई। लोगों ने श्रद्धा भाव से प्रतिमा की पूजा-अर्चना शुरू कर दी। प्रतिमा पर फूल, बेलपत्र एवं अन्य पूजा सामग्री अर्पित की गई। ग्रामीणों के अनुसार, जब प्रतिमा को मिट्टी से बाहर निकाला गया, उस समय उस पर तीन सांप लिपटे हुए थे। भीड़ और हलचल देखकर वे वहां से चले गए। इस घटना के बाद ग्रामीणों में विशेष धार्मिक आस्था देखी जा रही है।
इस संबंध में सामाजिक कार्यकर्ता हिमांशु शेखर ने बताया कि प्रतिमा के चारों ओर विभिन्न देवी-देवताओं की आकृतियां उकेरी गई हैं। उन्होंने प्रतिमा के चित्र पुरातत्वविद सुजीत झा को भेजे। सुजीत झा ने बताया कि प्रतिमा के एक ओर भगवान विष्णु और दूसरी ओर भगवान सूर्य की आकृति अंकित है। भगवान सूर्य की प्रतिमा के दोनों ओर कमल के फूल बने हुए हैं तथा भगवान के एक हाथ में पद्म दर्शाया गया है।
प्रतिमा के अन्य दो ओर भगवान गणेश एवं एक देवी की आकृति अंकित है। उन्होंने कहा कि भगवान सूर्य की इसी प्रकार की प्रतिमा मां तारा नगरी केसपा ग्राम में भी स्थापित है, जिससे इस प्रतिमा की धार्मिक और ऐतिहासिक महत्ता और अधिक बढ़ जाती है।
वहीं पैक्स अध्यक्ष विजय नारायण सिंह ने कहा कि प्रतिमा अत्यंत प्राचीन प्रतीत होती है। प्रतिमा के आधार भाग पर उकेरी गई कलात्मक आकृतियां इसकी ऐतिहासिक महत्ता को दर्शाती हैं। ग्रामीण सुनील शर्मा का कहना है कि यह क्षेत्र प्राचीन काल में किसी बड़े धार्मिक स्थल का केंद्र रहा होगा।
ग्रामीण दीनानाथ कुमार, संटू प्रसाद सहित अन्य लोगों ने बताया कि आहर के समीप मंदिर निर्माण कर प्रतिमा को विधिवत स्थापित करने की योजना बनाई जा रही है। गांव में प्रतिमा मिलने के बाद लोगों में धार्मिक उत्साह के साथ-साथ क्षेत्र के इतिहास को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं।
