राजेश सरकार / प्रयागराज
-जुलाई से शुरू हो सकती है प्रक्रिया, मूल आवंटियों पर सरकार का फोकस
उत्तर प्रदेश की श्रमिक बस्तियों में वर्षों से मालिकाना अधिकार की मांग कर रहे निवासियों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। प्रदेश सरकार द्वारा गठित राज्य परामर्शदात्री समिति ने ओडिशा, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश की श्रमिक कॉलोनियों का अध्ययन पूरा कर लिया है। इसके आधार पर अब उत्तर प्रदेश में श्रमिक कॉलोनियों के नियमितीकरण और मालिकाना अधिकार देने का अंतिम प्रारूप तैयार किया जा रहा है। शासन स्तर पर निर्णय के बाद जुलाई से प्रक्रिया शुरू होने की संभावना जताई जा रही है।
प्रस्तावित मसौदे में मूल आवंटी की श्रमिक कॉलोनी को वैध मानते हुए केवल पुराने आवंटियों को मालिकाना अधिकार देने पर सहमति बनती दिखाई दे रही है। जिन मूल आवंटियों ने कॉलोनी छोड़ दी है, उन्हें अथवा उनके वारिसों को बुलाकर रजिस्ट्री पत्र दिए जाने की भी तैयारी बताई जा रही है।
श्रमिक बस्ती समिति नैनी के महासचिव विनय मिश्र ने कहा कि श्रमिक बस्तियों के आवासों पर मालिकाना अधिकार की मांग को लेकर वर्षों से आंदोलन चल रहा है और अब यह मुहिम निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है। उनके अनुसार, कानपुर और लखनऊ की तर्ज पर नैनी समेत अन्य श्रमिक बस्तियों के लिए भी नीति तैयार की जा रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जुलाई तक प्रक्रिया शुरू नहीं हुई, तो आंदोलन फिर तेज किया जाएगा।
इस पूरे मसौदे को लेकर श्रमिक बस्तियों में नई बहस भी छिड़ गई है। समिति का कहना है कि यदि दशकों पहले आवास छोड़ चुके मूल आवंटियों या उनके वारिसों को अधिकार दिया गया, तो वर्तमान में रह रहे परिवारों के सामने विस्थापन और नए विवाद की स्थिति पैदा हो सकती है। ऐसे में सरकार को मौजूदा निवासियों से संवाद कर व्यवहारिक नीति बनानी चाहिए।
समिति जल्द ही उच्च अधिकारियों को ज्ञापन भेजकर वर्तमान स्थिति और संभावित समस्याओं से अवगत कराएगी। श्रमिक बस्ती संगठनों की मांग है कि राज्य परामर्शदात्री समिति में स्थानीय श्रमिक बस्ती समितियों को भी शामिल किया जाए, ताकि मालिकाना अधिकार की नीति सभी पक्षों के हितों को ध्यान में रखकर बनाई जा सके।
