अनिल मिश्र / रांची
मोदी सरकार की नीतियों ने आम आदमी की कमर तोड़ी: विजय शंकर नायक
विजय शंकर नायक ने कहा है कि भारत आज ऐसे आर्थिक दौर से गुजर रहा है, जहाँ एक तरफ सरकार “विश्वगुरु” और “5 ट्रिलियन इकोनॉमी” का सपना दिखा रही है, वहीं दूसरी तरफ गरीब, किसान, मजदूर और मध्यम वर्ग महंगाई, बेरोजगारी और गिरती आय से त्रस्त हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है।
उन्होंने कहा कि टीवी और विज्ञापनों में विकास दिखाई देता है, लेकिन जमीन पर जनता की थाली छोटी होती जा रही है। पिछले 12 वर्षों में रुपये की कीमत लगातार कमजोर हुई है। पेट्रोल-डीजल रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचे हैं, गैस सिलेंडर आम परिवार की पहुंच से बाहर हो गया है और खाद्य पदार्थों की कीमतों ने गरीबों की जिंदगी संकट में डाल दी है।
“महंगाई ने रसोई से सम्मान तक छीन लिया”
विजय शंकर नायक ने कहा कि अप्रैल 2026 में खुदरा महंगाई (CPI) 3.48 प्रतिशत बताई जा रही है, लेकिन असली महंगाई का दर्द सरकारी आंकड़ों से कहीं अधिक बड़ा है। उन्होंने कहा कि आज दाल, तेल, आटा, सब्जी और दूध की कीमतें पिछले वर्षों की तुलना में 20 से 40 प्रतिशत तक बढ़ चुकी हैं। घरेलू गैस सिलेंडर करीब 1100 रुपये तक पहुंच गया है और पेट्रोल-डीजल पर भारी टैक्स लगाकर जनता से वसूली की जा रही है।
उन्होंने कहा कि गांवों में मजदूर की दिहाड़ी 300-400 रुपये है, लेकिन परिवार चलाने का खर्च दोगुना हो चुका है। एक गरीब परिवार की आय वहीं की वहीं है, जबकि खर्च लगातार बढ़ रहा है। इसके कारण गरीब परिवार भोजन कम कर रहे हैं, बच्चों के पोषण में कटौती हो रही है, महिलाएं कर्ज लेने को मजबूर हैं और बुजुर्ग दवाएं छोड़कर गुजारा कर रहे हैं।
“गिरता रुपया आर्थिक विफलता का प्रतीक”
कांग्रेस नेता ने कहा कि मई 2026 में भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 95-96 रुपये के स्तर तक पहुंच गया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में भाजपा सरकार बनने के समय डॉलर लगभग 58-60 रुपये के आसपास था। उनके अनुसार, मोदी सरकार के दौर में रुपया करीब 35-40 प्रतिशत कमजोर हुआ है।
उन्होंने कहा कि रुपये के कमजोर होने का सीधा असर गरीबों पर पड़ता है, क्योंकि भारत कच्चा तेल, इलेक्ट्रॉनिक सामान, खाद और कई औद्योगिक कच्चे माल का आयात करता है। रुपये के कमजोर होने से आयात महंगा हो जाता है और उसका बोझ जनता पर डाल दिया जाता है। इससे पेट्रोल-डीजल, ट्रांसपोर्ट, खेती, खाद्य वस्तुएं और दवाइयां महंगी हो जाती हैं।
“बेरोजगारी और महंगाई का डबल अटैक”
विजय शंकर नायक ने कहा कि देश का युवा दोहरी मार झेल रहा है— एक तरफ नौकरी नहीं है और दूसरी तरफ महंगाई लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि लाखों सरकारी पद खाली पड़े हैं, निजी क्षेत्र में स्थायी रोजगार घटे हैं और ठेका आधारित रोजगार बढ़ा है।
उनके अनुसार, शिक्षित युवा छोटे-मोटे काम करने को मजबूर हैं। रोजगार की कमी के कारण बाजार में खरीद क्षमता भी घट रही है, जिसका असर छोटे दुकानदारों, रिक्शा चालकों, किसानों और मध्यम वर्ग पर पड़ रहा है।
“अमीर-गरीब के बीच खाई बढ़ी”
उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार के कार्यकाल में कुछ बड़े कॉर्पोरेट घरानों की संपत्ति कई गुना बढ़ी, जबकि गरीब और गरीब होता गया। किसानों की आय दोगुनी करने का वादा अधूरा रह गया, MSP पर कानूनी गारंटी नहीं मिली और मजदूरों के श्रम अधिकार कमजोर किए गए।
उन्होंने कहा कि सरकार बड़े उद्योगपतियों के कर्ज माफ करती रही, लेकिन किसानों के छोटे कर्ज पर नोटिस भेजे जाते हैं।
“GDP का आंकड़ा जनता की भूख नहीं मिटाता”
कांग्रेस नेता ने कहा कि सरकार GDP वृद्धि दर 7 प्रतिशत से अधिक होने का दावा करती है, लेकिन सवाल यह है कि उस विकास का लाभ किसे मिल रहा है। उन्होंने कहा कि यदि गरीब भूखा है, युवा बेरोजगार है, किसान कर्जदार है और मध्यम वर्ग EMI के बोझ में दबा है, तो विकास अधूरा है।
कांग्रेस का समाधान
विजय शंकर नायक ने कहा कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ऐसी अर्थव्यवस्था की पक्षधर रही है, जिसमें विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। उन्होंने सुझाव दिया कि पेट्रोल-डीजल पर टैक्स कम किया जाए, गैस सिलेंडर पर सब्सिडी बढ़ाई जाए, मनरेगा और ग्रामीण रोजगार को मजबूत किया जाए तथा युवाओं के लिए स्थायी सरकारी भर्तियां निकाली जाएं।
उन्होंने किसानों को MSP की कानूनी गारंटी देने, छोटे व्यापारियों को टैक्स और बैंकिंग राहत देने तथा शिक्षा और स्वास्थ्य पर सरकारी निवेश बढ़ाने की भी मांग की।
उन्होंने कहा कि आज भारत का आम नागरिक आर्थिक असुरक्षा के दौर से गुजर रहा है। महंगाई ने रसोई तोड़ी है, बेरोजगारी ने युवाओं का भविष्य छीना है और गिरते रुपये ने जीवन को और महंगा बना दिया है। उन्होंने कहा कि जब तक गरीब की थाली भरपूर नहीं होगी, किसान खुशहाल नहीं होगा और युवा रोजगार से नहीं जुड़ेगा, तब तक विकास अधूरा रहेगा।
