मुख्यपृष्ठस्तंभसिर्फ ९ प्रतिशत सपोर्ट ही तो है...!

सिर्फ ९ प्रतिशत सपोर्ट ही तो है…!

गजबै का नेक्स्ट-लेवल कैलकुलेशन चल रहा है। बीजेपी कह रही है कि इस ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) को इंडिया से सिर्फ ९ प्रतिशत सपोर्ट है, बाकी सब पाकिस्तान का क्रॉस-बॉर्डर गेम है। अब पब्लिक सोच रही है कि बॉस, अगर सिर्फ ९ प्रतिशत ही मामला है, तो इस नन्हे से ‘कॉकरोच’ से इतनी पैनिक होने की क्या जरूरत है?
ये ‘किचन’ के नहीं, ‘मीम-मास्टर्स’ हैं। नॉर्मल कॉकरोच तो चप्पल देखकर अंडरग्राउंड हो जाता है। लेकिन ये ९ प्रतिशत वाले कॉकरोच सोशल मीडिया पर ट्रेंडिंग हैं। ये काटते नहीं हैं, बल्कि बेरोजगारी और नीट पेपर लीक जैसे सेंसिटिव इश्यूज पर ऐसे सैवेज मीम्स बनाते हैं कि बड़े-बड़ों का सिस्टम हिल जाता है।
बायोलॉजी का रूल है, घर में एक कॉकरोच दिखे, तो समझो दीवार के पीछे पूरी आर्मी छुपी है। नेताओं को डर है कि ये ९ प्रतिशत तो सिर्फ ट्रेलर है, असली पिक्चर अभी बाकी है! अगर बाकी की साइलेंट मेजॉरिटी भी जाग गई, तो इतने अकाउंट्स को बैन करने के लिए आईटी सेल थक जाएगी।
सरकार ने पूरा एंटी-कॉकरोच कैंपेन चला दिया है! इंस्टाग्राम हैक्ड, ट्विटर ब्लॉक्ड, बैकअप हैंडल्स भी टर्मिनेटेड! लेकिन भाई साहब, कॉकरोच की स्पीशीज डायनासोर के जमाने की है, ये न्यूक्लियर अटैक भी झेल जाते हैं। इधर एक अकाउंट डिलीट करो, उधर ये नए हैंडल से रीस्पॉन होकर वापस आ जाते हैं। सबसे बड़ा डर तब होता है व्हेन कॉकरोच स्टार्ट्स फ्लाइंग। जमीन पर चलता कॉकरोच फिर भी मैनेजेबल है, लेकिन जैसे ही वो पंख फैलाकर फ्लाई करने लगता है, अच्छे-अच्छे का कॉन्फिडेंस डगमगा जाता है। ये ९ प्रतिशत अब उड़-उड़कर सीधे मंत्रियों का रेजिग्नेशन मांग रहे हैं। द अल्टीमेट लॉजिक यही है कि आंकड़ा भले ९ प्रतिशत का हो, लेकिन जब ये डिजिटल कॉकरोचेस ‘सटायर’ का वेपन लेकर पीछे पड़ जाएं, तो अच्छे-अच्छों को लगने लगता है कि दाल में कुछ काला नहीं, बल्कि पूरी दाल में ही बग आ गया है! इसीलिए तो कहते हैं…९ प्रतिशत को अंडरएस्टीमेट मत करो बाबू भाई!

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