-बंदर अब्बास के पास हलचल, ईरान ने कहा कि हालात काबू में
होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास सोमवार को सुनाई दी धमाकों की आवाजों ने एक बार फिर दुनिया का ध्यान पश्चिम एशिया के उस समुद्री रास्ते की ओर खींच दिया है, जहां से गुजरने वाली हर हलचल सीधे वैश्विक तेल बाजार, समुद्री व्यापार और भारत जैसी ऊर्जा-निर्भर अर्थव्यवस्थाओं को प्रभावित कर सकती है। ईरानी मीडिया के हवाले से आई रिपोर्टों के अनुसार, बंदर अब्बास और होर्मुज के आसपास के तटीय क्षेत्रों में धमाकों की आवाजें सुनी गर्इं, हालांकि कारण तत्काल स्पष्ट नहीं हो सका। ईरानी एजेंसी मेहर ने दावा किया कि बंदर अब्बास में स्थिति नियंत्रण में है और घबराने की जरूरत नहीं है।
बंदर अब्बास ईरान का महत्वपूर्ण बंदरगाह क्षेत्र है और होर्मुज जलडमरूमध्य के निकट होने के कारण इसकी सामरिक अहमियत बहुत अधिक है। यही वह समुद्री रास्ता है, जिसे दुनिया के सबसे संवेदनशील ऊर्जा मार्गों में गिना जाता है। अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन के अनुसार, २०२४ और २०२५ की पहली तिमाही में होर्मुज से होकर गुजरने वाला तेल प्रवाह वैश्विक समुद्री तेल व्यापार के एक-चौथाई से अधिक और दुनिया की कुल तेल-पेट्रोलियम खपत के करीब पांचवें हिस्से के बराबर रहा। इसी मार्ग से वैश्विक एलएनजी व्यापार का भी बड़ा हिस्सा गुजरता है।
धमाकों की इन खबरों के बीच भारत और ईरान के बीच कूटनीतिक बातचीत भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ईरान के उप विदेश मंत्री माजिद तख्त-रवांची ने भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी से फोन पर बातचीत की। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के अनुसार, चर्चा में क्षेत्रीय घटनाक्रम और द्विपक्षीय सहयोग की समीक्षा शामिल रही। यह बातचीत ऐसे समय हुई है, जब अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने या वहां तनाव कम करने को लेकर शुरुआती सहमति की चर्चा भी सामने आ रही है।
भारत के लिए यह घटनाक्रम केवल विदेश नीति का मुद्दा नहीं है, बल्कि सीधे अर्थव्यवस्था, महंगाई और ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ा प्रश्न है। कच्चे तेल की कीमतों में अचानक उछाल आने पर पेट्रोल-डीजल, परिवहन, खाद्य पदार्थों की ढुलाई, उर्वरक और औद्योगिक लागत तक प्रभावित होती है। होर्मुज में तनाव बढ़ता है तो इसका असर सबसे पहले एशियाई देशों पर पड़ता है, क्योंकि इस मार्ग से गुजरने वाले तेल और गैस का बड़ा हिस्सा एशिया की ओर जाता है। अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के अनुसार, २०२५ में होर्मुज से गुजरने वाले तेल और तेल उत्पादों का लगभग ८० प्रतिशत एशिया के लिए था।
फिलहाल ईरान स्थिति को नियंत्रण में बता रहा है, लेकिन धमाकों की आवाजें, सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता और भारत-ईरान की उच्चस्तरीय बातचीत संकेत दे रही है कि होर्मुज में सब कुछ सामान्य नहीं है। यह क्षेत्र युद्ध और शांति के बीच झूलती उस पतली रेखा जैसा है, जहां एक गलत कदम तेल बाजारों में आग लगा सकता है और दुनिया की अर्थव्यवस्था को नया झटका दे सकता है। होर्मुज का संकट केवल समुद्र में उठी लहर नहीं, बल्कि तेल, कूटनीति और युद्ध की संभावनाओं से भरा वह मोड़ है, जिस पर भारत समेत पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।
