अनिल मिश्र / रांची
झारखंड प्रदेश में जेएससीए-सीजीएल नियुक्ति रद्द किए जाने के बाद नियुक्त अभ्यर्थियों का दर्द अब खुलकर सामने आ रहा है। कल सोमवार तक जो युवा सरकारी दफ्तरों में अधिकारी-कर्मचारी के तौर पर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे, आज वे खुद को बेरोजगार बता रहे हैं। झारखंड प्रदेश के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सरकार की ओर से कल सोमवार को जेएससीए -सीजीएल नियुक्ति रद्द किए जाने के ऐलान के बाद राजधानी रांची में कर्मचारियों का विरोध प्रदर्शन जारी हो गया है। आपको बताते चलें कि झारखंड प्रदेश में अभी अच्छी तरह से बारिश हो रही है। उसके बाबजूद भी कर्मचारी प्रोजेक्ट भवन के सामने डटे हुए हैं। उनका कहना है कि नियुक्ति रद्द करने से पहले उनका पक्ष तक नहीं सुना गया और उन्हें लिखित रूप से भी इसकी सूचना नहीं दी गई। कोई स्टैटिस्टिक्स अफसर था, कोई रेलवे में, कोई दूसरे राज्य में सरकारी नौकरी कर रहा था प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों की कहानी एक जैसी नहीं है, लेकिन दर्द लगभग एक जैसा हैं। जेएससीए-सीजीएल में चयन के बाद इन युवाओं ने झारखंड लौटने की उम्मीद में अपनी पुरानी नौकरियां तक छोड़ दीं है।कई अभ्यर्थियों ने बेहतर भविष्य और अपने गृह राज्य में सेवा करने के सपने के साथ जेएससीए की नौकरी ज्वाइन की थी।अब कल सोमवार एक एक नियुक्ति रद्द होने के बाद उनके सामने सबसे बड़ा सवाल है—क्या वे अपनी पुरानी नौकरी में वापस लौट पाएंगे?झारखंड में जेपीएससी नियुक्ति रद्द किए जाने से करीब दो हजार युवाओं के भविष्य पर संकट आ गया है। जो कल तक सरकारी अधिकारी थे, आज खुद को बेरोजगार बता रहे हैं।नियुक्ति रद्द करने के खिलाफ कर्मचारी सड़क पर उतर आए हैं।नियुक्ति रद्द होने के बाद कर्मचारियों ने आंदोलन और तेज करने का ऐलान किया है उनका कहना है कि अगर सरकार अपना फैसला वापस नहीं लेती है तो वे आमरण अनशन शुरू करेंगे। कर्मचारियों का साफ कहना है कि वे अपनी नौकरी और भविष्य की लड़ाई अब सड़क से लेकर अदालत तक लड़ेंगे। वहीं सरकारी बाबू से बेरोजगार बने युवाओं ने बताया कि नौकरी वापस नहीं हुई तो आमरण अनशन करेंगे।हमें अब कोर्ट पर भरोसा है। वहीं झारखंड में जेपीएससी- सीजीएल विवाद में अब हेमंत सोरेन सरकार के सामने चुनौती और बड़ी हो गयी है। एक तरफ परीक्षा में कथित गड़बड़ी को लेकर आंदोलन कर रहे छात्रों की मांगें हैं, तो दूसरी तरफ चयनित होकर नौकरी कर रहे करीब दो हजार कर्मचारियों का भविष्य है। हालांकि, सरकार ने जेएसएससी सीजीएल नियुक्ति को रद्द करने का फैसला कल कैबिनेट में कर लिया और मुख्यमंत्री ने वकायदा इसका ऐलान भी कर दिया है अब नियुक्त कर्मचारी सवाल उठा रहे हैं कि अगर किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो उसकी सजा उन युवाओं को क्यों मिले, जिन्होंने अपनी मेहनत और मेरिट के आधार पर नौकरी हासिल की?
