मुख्यपृष्ठस्तंभफलसफा : वन-नाइट स्टैंड: बदलती सोच या बदलते रिश्ते?

फलसफा : वन-नाइट स्टैंड: बदलती सोच या बदलते रिश्ते?

 सना खान

मुंबई की बारिश वाली रात थी। ऑफिस से निकलने के बाद रिया घर लौटने वाली थी, लेकिन दोस्तों के साथ हुई मुलाकात लंबी हो गई। वहीं उसकी मुलाकात आरव से हुई। बातचीत काम से शुरू हुई और पसंद-नापसंद से होती हुई निजी बातों तक पहुंच गई। पहली मुलाकात थी, लेकिन झिझक कम थी। दोनों जानते थे कि यह किसी रिश्ते की शुरुआत नहीं है। अपनी सीमाओं और सहमति को समझते हुए उन्होंने रात साथ बिताने का पैâसला किया। सुबह रिया के लिए बात खत्म हो चुकी थी। अगले दिन आरव का संदेश आया- ‘अच्छा लगा। अपना ख्याल रखना।’ रिया कुछ देर फोन देखती रही। उसे समझ नहीं आया कि संदेश से राहत मिली है या खालीपन। बाहर से वन-नाइट स्टैंड सिर्फ एक रात है, लेकिन उसके मायने हर व्यक्ति के लिए अलग हो सकते हैं।
डेटिंग ऐप से बदलता रिश्ता
एक समय था जब रिश्ते मुलाकात, दोस्ती और प्यार से होते हुए भविष्य की ओर बढ़ते थे। मुंबई जैसे महानगर में अब डेटिंग ऐप, सोशल मीडिया और व्यस्त जीवन ने लोगों के मिलने के तरीके बदल दिए हैं। मुंबई के १८ से २५ वर्ष के १,६४१ कॉलेज विद्यार्थियों पर किए गए एक अध्ययन में १२.७ प्रतिशत ने डेटिंग ऐप इस्तेमाल करने की बात कही। ऐप इस्तेमाल करने वालों में ३०.३ प्रतिशत प्यार या साथी की तलाश में थे, जबकि २८.४ प्रतिशत ने बिना प्रतिबद्धता वाले शारीरिक संबंध और २६.९ प्रतिशत ने नए अनुभवों को वजह बताया। यह वन-नाइट स्टैंड का आंकड़ा नहीं है, लेकिन बदलती डेटिंग पसंद की तस्वीर जरूर दिखाता है। इसी अध्ययन में ८ प्रतिशत प्रतिभागियों ने आकस्मिक मुलाकातों और १६.९ प्रतिशत ने डेटिंग का अनुभव बताया। आज एक मोबाइल ऐप से शुरू हुई बातचीत भी नजदीकी तक पहुंच सकती है।
एक रात, अलग-अलग मायने
रिया को आरव से प्यार नहीं हुआ था, लेकिन वह उस रात को भूल नहीं पा रही थी। कुछ दिनों बाद आरव का संदेश आया- ‘कॉफी?’ रिया मुस्कुराई। शायद वह रात उसके लिए उतनी साधारण नहीं थी, जितनी उसने सोची थी। वन-नाइट स्टैंड किसी के लिए एक अनुभव, तो किसी के लिए नए रिश्ते की शुरुआत हो सकता है।
आजादी के साथ जिम्मेदारी
मुंबई के इसी अध्ययन में ११.५ प्रतिशत डेटिंग ऐप उपयोगकर्ताओं ने अप्रिय अनुभव या पछतावे की बात कही। इसलिए सहमति, सुरक्षा और निजता जरूरी हैं। समाज के पैमाने भी अलग हैं- पुरुष के लिए स्वीकार्य मानी जाने वाली बात महिला के लिए अक्सर सवाल बन जाती है। रिया और आरव ने तय किया कि रिश्ता चाहे कोई नाम न पाए, ईमानदारी और सम्मान बना रहना चाहिए। सवाल यह नहीं कि वन-नाइट स्टैंड सही है या गलत। सवाल यह है- क्या रिश्तों के साथ हमारी जरूरतें और उम्मीदें भी बदल रही हैं?

 

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