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संपादकीय : राष्ट्रीय कार्यकारिणी झूठी और सच्ची!

भाजपा की नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी घोषित हो गई है। राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर नितिन नबीन की नियुक्ति को सात महीने हो गए हैं। उसके बाद आठवें महीने में उनकी कार्यकारिणी घोषित हुई। कार्यकारिणी हो या न हो, आज की भाजपा को क्या फर्क पड़ता है? अमित शाह, मोदी वगैरह जिस दिशा में चाहेंगे उसी दिशा में पार्टी की गाड़ी चलाई जाएगी और जो उस गाड़ी को चुपचाप चलाए, ऐसे लोगों को ढूंढकर उनकी कार्यकारिणी बनाना कोई मुश्किल काम नहीं है। फिर भी उन्हें सात महीने लग गए, यह विशेष बात है। इस दौरान नितिन नबीन ने बिहार की अपनी विधायकी की सीट खाली कर दी। उस बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में हुए उपचुनाव में भाजपा की हार हो गई। राष्ट्रीय अध्यक्ष अपनी विधानसभा की सीट तक नहीं बचा पाए। भाजपा को जब ठग से भी बड़ा ठग मिलता है तो उनकी हार होती है। बांकीपुर में जब प्रशांत किशोर नाम का महाठग सामने आया तो भाजपा के चुनावी सारे ‘चालबाज’ धंधे उजागर हो गए। यह साफ हो गया कि भाजपा कोई भी चुनाव सीधे तरीके से जीत ही नहीं सकती। अब यह सामने आया है कि प्रे. ट्रंप ने कथित तौर पर भारतीय चुनाव प्रणाली की तारीफ की है। एक फ्रॉड आदमी दूसरे ‘फ्रॉड’ सिस्टम की तारीफ करे तो इसमें आश्चर्य क्या है? अमेरिका के आम चुनाव में ‘ईवीएम’ का इस्तेमाल नहीं होता। ‘ईवीएम’ प्रणाली एक घोटाला है और इससे नतीजे बदले जा सकते हैं, यह बात तुलसी गबार्ड और एलन मस्क पहले ही कह चुके हैं। भारत में उसी ‘ईवीएम’ से चुनाव होते हैं। अमेरिका में सभी चुनाव मतपत्र से होते हैं। भारत में भी
उसी तरीके से चुनाव
हों, यह मांग चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी। इसी में चुनाव घोटाले के बीज बोए गए हैं। कहने का मतलब ये है कि भाजपा की नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी पर चुनाव जिताने की कोई जिम्मेदारी नहीं है। वो काम भाजपा वालों ने ईवीएम, चुनाव आयोग, पुलिस बल और पैसों के खोखों पर छोड़ दिया है और यही भाजपा की असली कार्यकारिणी है। इस कार्यकारिणी के अध्यक्ष अमित शाह हैं। ऐसे में नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी क्या करेगी? यही सवाल है। फिर भाजपा की इस नई कार्यकारिणी में कौन हैं, यह देखना दिलचस्प है। देश के सबसे अमीर पार्टी के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष पद पर केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल को नियुक्त करना जितना चौंकाने वाला है उतना ही अनैतिक है। सत्ताधारी पार्टी का खजांची एक केंद्रीय मंत्री हो, इसका मतलब यही है कि वो सत्ता के जरिए भ्रष्टाचार, लूट, दलाली करके पार्टी का खजाना भरे। कम से कम गोयल को नैतिकता के आधार पर मंत्री पद छोड़ देना चाहिए और उसके बाद खजाने की राष्ट्रीय जिम्मेदारी स्वीकारनी चाहिए। लेकिन नैतिकता वगैरह से भाजपा का कोई रिश्ता ही नहीं है। भाजपा के खजाने में अभी सात हजार करोड़ रुपए जमा हैं। देश के हर जिले में पार्टी के भव्य कार्यालय बने हैं, वो कार्यकर्ताओं के चंदे या श्रमदान से नहीं बने हैं। यह अमीरों की पार्टी, अमीरों के लिए देश की लूट से चलाई जा रही है। उस लूटमार से अयोध्या में श्रीराम की दानपेटियां भी नहीं बचीं। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के कोषाध्यक्ष बनने से वो
भाजपा का खजाना
और भारत के व्यापारिक करार, लाइसेंस वगैरह में सांठ-गांठ करेंगे। भाजपा की ‘नबीन’ टीम में ‘नवीन’ क्या है? जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने राम माधव पर टेंडरबाजी और कमीशनखोरी का आरोप लगाया था। उसके बाद उन्हें कुछ समय के लिए पार्टी काम से दूर रखा गया। लेकिन अब वही राम माधव नए जोश के साथ नई कार्यकारिणी में अवतरित हो गए हैं। राष्ट्रीय ‘आईटी’ सेल से बदनाम अमित मालवीय को हटा दिया गया। ‘जंतर मंतर’ पर युवा बच्चों ने उस समय भाजपा के ‘आईटी’ सेल की धज्जियां उड़ा दी थीं। इसलिए मालवीय को घर भेज दिया गया। आईटी सेल ‘जंतर मंतर’ आंदोलन को बदनाम करने, झूठ गढ़ने में नाकाम रहा। अब मालवीय की जगह कोई दीपक म्हस्के आए हैं। स्मृति ईरानी का वनवास खत्म करके उन्हें पार्टी में जिम्मेदारी दी गई है। वसुंधरा राजे सिंधिया, महाराष्ट्र से अनुभवी नेता विनोद तावडे महासचिव पद पर बने हुए हैं। भारती पवार का राष्ट्रीय कार्यकारिणी में शामिल होना महाराष्ट्र की भाजपा के लिए आश्चर्यजनक है। तारिक मंसूर एकमात्र मुस्लिम नेता हैं जिन्हें भाजपा की नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी में लिया गया है। इसे भारत के मुस्लिम समाज पर उपकार ही समझिए। भाजपा की बहुत दिन से लटकी हुई और अब घोषित हुई नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी कोई बहुत तेजस्वी या शक्तिशाली नहीं है। मोदी-शाह को जैसे चाहिए थे, वैसे ही लोग इस कार्यकारिणी में नियुक्त किए गए हैं, विशेष क्या है? ईवीएम, चुनाव आयोग, ईडी, खोखे यही भाजपा के असली कार्यकारिणी सदस्य हैं। नए ‘खजांची’ असली कार्यकारिणी को र्इंधन देने का काम करेंगे ही करेंगे।

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