-ट्री ऑडिट के दावों की खुली पोल
-हादसे के बाद ही जागता है प्रशासन
द्रुप्ति झा / मुंबई
मुंबई में बारिश आते ही सड़कों पर सिर्फ पानी नहीं भरता, बल्कि प्रशासन की लापरवाही भी खुलकर सामने आ जाती है। चर्चगेट में सोमवार को हुए पेड़ गिरने का हादसा इसी व्यवस्था की एक और डरावनी तस्वीर है। केलन भवन के सामने बी-२ मेट्रो स्टेशन के पास विशाल बरगद का पेड़ अचानक सड़क पर जा गिरा। इस घटना में दो नागरिक गंभीर रूप से घायल हुए और चार वाहन क्षतिग्रस्त हो गए। गनीमत रही कि हादसा ज्यादा भयावह नहीं हुआ। सवाल यह है कि आखिर पेड़ गिरने के बाद भी मनपा ऑडिट में इतनी लापरवाही कैसे बरत सकती है?
पेड़ों की जड़ों पर कंक्रीट, ऊपर से सुरक्षा का दावा
मुंबई में वर्षों से पेड़ों की छंटाई, जड़ों की सुरक्षा और खतरनाक पेड़ों की पहचान के नाम पर अभियान चलाए जाते हैं, लेकिन जमीन पर स्थिति इसके ठीक उलट दिखाई देती है। विकास के नाम पर पेड़ों के आसपास लगातार कंक्रीटीकरण हो रहा है। पेड़ों की जड़ों को सांस लेने तक की जगह नहीं मिलती और बारिश में कमजोर हुए पेड़ राहगीरों और वाहन चालकों के लिए मौत का जाल बन जाते हैं। मनपा के पास पेड़ों की संख्या, उनकी स्थिति और उनकी निगरानी से जुड़े तमाम रिकॉर्ड हैं। फिर भी हादसे लगातार होते हैं। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि ऑडिट वास्तव में पेड़ों का हो रहा है या सिर्फ फाइलों का।
हादसों की लंबी होती लिस्ट
चर्चगेट की घटना कोई अकेली घटना नहीं है। इससे पहले भी मुंबई के अलग-अलग इलाकों में पेड़ गिरने से वाहन क्षतिग्रस्त हुए और लोगों की जान गई। सिडेनहैम कॉलेज के सामने पेड़ गिरने की घटना हो या चेंबूर में पेड़ गिरने से छात्र की मौत हर हादसे के बाद जांच और कार्रवाई के आश्वासन दिए गए, लेकिन कुछ दिनों बाद मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है।
