-मुंबई से पकड़े गए युवकों ने किया रहस्योद्घाटन
-खाते में पैसे डालकर बरगला रहा है आईएसआई
फिरोज खान / मुंबई
पाकिस्तान जानता है कि वह सीधे भारत से मुकाबला नहीं कर सकता है, इसलिए वह देश के प्रमुख शहरों में टेररिस्ट अटैक करके जान के साथ-साथ माल का नुकसान करवाता आया है। पहले उसने भारत में जाली नोट पैâलाकर और ड्रग्स की सप्लाई कर खोखला बनाने की कोशिश की है। अब पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई ने मुंबई, दिल्ली और अन्य शहरों के बेरोजगार और ड्रग्स एडिक्ट युवाओं को निशाना बनना शुरू कर दिया है।
पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई अच्छी तरह जानती है कि बेरोजगार और नशे का आदि युवक पैसों की तंगी से गुजरता है। इसी का फायदा उठाकर उन्हें पैसों का लालच देकर टेररिस्ट बनाया जा रहा है। इस बात का खुलासा तब हुआ जब हाल ही में दिल्ली पुलिस ने मुंबई से दो युवाओं को पकड़ा। भारतीय एजेंसियों का मानना है कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई मुंबई, दिल्ली और दूसरे शहरों के बेरोजगार युवाओं को कट्टरपंथी बनाकर और आतंकवाद से जुड़ी गतिविधियों को करने के लिए पैसे का लालच देकर भारत में अपना नेटवर्क बढ़ाने की कोशिश कर रही है।
मुंबई से साजिद और मुंब्रा से तौकीर की गिरफ्तारी
इस केस में मुंबई के साजिद और मुंब्रा के तौकीर शेख को गिरफ्तार किया गया है। आरोपियों के घरवालों ने पुलिस को बताया कि पैसे ट्रांसफर करने वाले ऑनलाइन कॉन्टैक्ट्स के जरिए इस रैकेट में दोनों शामिल हुए थे। आरोपी साजिद कई सालों से ड्रग्स की लत से जूझ रहा था और करीब चार महीने पहले उसे नशे की लत की वजह से घर से निकाल दिया गया था।
पहले कुर्ला में रहता था तौकीर
पकड़े गए तौकीर शेख का परिवार पहले कुर्ला (ईस्ट) में रहता था, कुछ साल पहले मुंब्रा में शिफ्ट हो गया। साजिद और तौकीर एक-दूसरे को कई सालों से जानते थे और अक्सर मिलते रहते थे। साजिद के पिता की कम उम्र में ही मौत हो गई थी, जबकि उनकी मां की करीब छह साल पहले टीबी से मौत हो गई थी। उनकी मौत के बाद, वह कुर्ला (ईस्ट) के नेहरू नगर इलाके में रेलवे ट्रैक के पास एक किराए के घर में अपनी दादी के साथ रहने लगा।
तौकीर को १५ साल की उम्र में ड्रग्स की लत लग गई थी, ड्रग्स की लत छुड़वाने के लिए उसे टिटवाला के एक नशामुक्ति केंद्र में भर्ती कराया गया था। वह लगभग चार महीने तक वहां रहा, लेकिन इलाज से कोई खास सुधार नहीं हुआ। आरोपियों से पूछताछ में पता चला है कि यह रैकेट तब शुरू हुआ जब मुंब्रा के रहने वाले उजेफा नाम के युवक को एक ऑनलाइन कॉन्टैक्ट के ज़रिए पैसे मिले। उसने दूसरों को बताया कि एक ऑनलाइन गैंग पैसे बांट रहा है। साजिद और मुंब्रा का एक और लड़का तौकीर शेख, उनके अकाउंट में पैसे लेने के लिए तैयार हो गए, उन्हें लगा कि वे बस पैसे ले लेंगे और उसके बाद अकाउंट ब्लॉक कर देंगे। साजिद को उसके बैंक अकाउंट में ऑनलाइन २५,००० रुपए मिले।
इसी तरह तौकीर को अपने बैंक अकाउंट में २१,००० रुपए मिले। दोनों के घरवालों का कहना है उन्हें यह पता नहीं था कि ऑनलाइन खाते में पैसे डालनेवालों का कनेक्शन पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई से है। इसके अलावा पूछताछ में दोनों ने पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी के साथ किसी भी तरह के संबंध से इनकार किया है।
आरोपियों, विदेशी हैंडलर्स और अंडरवर्ल्ड के लिंक की जांच
दिल्ली पुलिस आरोपियों, विदेशी हैंडलर्स और अंडरवर्ल्ड ऑपरेटिव्स के बीच लिंक की जांच कर रही है। पुलिस को शक है कि ग्रुप को दिल्ली, मुंबई और दूसरे शहरों में टेरर एक्टिविटीज को अंजाम देने की एक बड़ी साजिश के तहत ऑनलाइन चैनलों के ज़रिए कट्टरपंथी बनाने के लिए फंड दिया जा रहा था। स्पेशल सेल इस मामले में फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन, डिजिटल कम्युनिकेशन और पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स की भूमिका की जांच जारी रखे हुए हैं।
