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मोदी की अपील मटियामेट… शिंदे के ‘सिपाही’ ने निकाला महंगी गाड़ियों का काफिला!

-नासिक हाइवे से कलेक्टर कार्यालय तक लगा जाम

-रविंद्र फाटक के नामांकन पर किया गया शक्ति प्रदर्शन

सामना संवाददाता / मुंबई

एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं से सादगी तथा जनसुविधा का ध्यान रखने की अपील करते हैं, वहीं दूसरी ओर महायुति के नेता खुलकर शक्ति प्रदर्शन कर रहे हैं, जो आम नागरिकों की मुश्किलें बढ़ा रही है।
ठाणे में ठाणे-पालघर विधान परिषद के लिए शिंदे गुट के उम्मीदवार रवींद्र फाटक के नामांकन के दौरान हाइवे पर घंटों जाम लगा रहा। महंगी गाड़ियों के लंबे काफिले और समर्थकों की भीड़ के कारण शहर के प्रमुख मार्गों पर घंटों तक यातायात प्रभावित रहा, जिससे लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिली। लोग शिंदे गुट के इस बर्ताव को लेकर आक्रोशित दिखे।
नामांकन दाखिल करने पहुंचे थे फाटक
जानकारी के अनुसार, महायुति की ओर से उम्मीदवार घोषित किए गए रविंद्र फाटक सोमवार को नामांकन दाखिल करने से पहले टेंभीनाका स्थित आनंद आश्रम पहुंचे थे। उनके स्वागत और समर्थन के लिए बड़ी संख्या में पदाधिकारी, नगरसेवक और कार्यकर्ता अपने वाहनों के साथ वहां पहुंचे। सड़क किनारे बड़ी संख्या में महंगी गाड़ियां खड़ी किए जाने से यातायात व्यवस्था चरमरा गई।
नाराज जनता, मस्ती में नेता
कड़ी धूप में लोग घंटों ट्रैफिक में फंसे रहे। स्थिति यह रही कि चिंतामणि चौक से लेकर जिला कलेक्टर कार्यालय तक वाहनों की लंबी कतारें लग गर्इं। खारटन रोड और बाजारपेठ मार्ग जैसे वैकल्पिक रास्तों पर भी जाम का भारी दबाव देखने को मिला। दोपहर की गर्मी में फंसे वाहन चालकों और आम नागरिकों को घंटों परेशानी झेलनी पड़ी। कई लोगों ने राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन के कारण उत्पन्न अव्यवस्था पर नाराजगी व्यक्त की।
हद तो तब हो गई जब दोपहर बाद उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। इसके बाद भीड़ और बढ़ गई, जिससे पहले से जाम झेल रहे क्षेत्रों में यातायात और अधिक प्रभावित हुआ। स्थानीय लोगों का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया के नाम पर जनता की सुविधा की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। राजनीतिक गलियारों में भी इस घटनाक्रम को लेकर चर्चा है। आलोचकों का कहना है कि जब देश का नेतृत्व सादगी और अनावश्यक दिखावे से बचने की बात करता है, तब जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं द्वारा महंगी गाड़ियों के काफिलों के जरिए शक्ति प्रदर्शन करना उस संदेश के विपरीत दिखाई देता है। नेताओं के राजनीतिक ताकत दिखाने की कीमत आम जनता को ट्रैफिक जाम, समय की बर्बादी और परेशानियों के रूप में चुकानी पड़ रही है। जनता की नाराजगी खुलकर सामने आई।

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