मुख्यपृष्ठनए समाचारसहयोगियों को खत्म करने पर तुली है भाजपा...शिंदे गुट में भारी आक्रोश,...

सहयोगियों को खत्म करने पर तुली है भाजपा…शिंदे गुट में भारी आक्रोश, अब्दुल सत्तार भड़के

सामना संवाददाता / मुंबई

महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव २०२६ के दौरान महायुति में अंदरूनी खींचतान खुलकर सामने आ गई है। छत्रपति संभाजीनगर-जालना स्थानीय प्राधिकरण निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा द्वारा सुहास शिरसाट को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद शिंदे गुट ने कड़ी नाराजगी जताई है। शिंदे गुट के मंत्री अब्दुल सत्तार ने भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा अपने सहयोगी दल शिंदे गुट को राजनीतिक रूप से खत्म करने में लगी हुई है।
सत्तार ने कहा कि शिंदे गुट को खत्म करने का काम हमारा ही सहयोगी दल कर रहा है। हमने गठबंधन के लिए बड़े त्याग किए, लेकिन भाजपा अब सब कुछ भूल चुकी है। पहले हमारे हाथ-पैर काटे गए और अब हमारा सिर काटने की कोशिश की जा रही है। यहां भाजपा प्रत्यासी शिरसाट के खिलाफ शिंदे गुट के नेता अब्दुल सत्तार के पुत्र समीर सत्तार ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल कर दिया है। इस घटनाक्रम ने महायुति में चल रहे असंतोष को सार्वजनिक कर दिया है।
उन्होंने दावा किया कि स्थानीय निकायों और क्षेत्रीय राजनीति में शिंदे गुट का प्रभाव लगातार कम किया जा रहा है, जबकि भाजपा के नेता मजबूत होते जा रहे हैं। अब्दुल सत्तार की नाराजगी को शिंदे गुट के भीतर बढ़ते असंतोष का संकेत माना जा रहा है। टिकट वितरण और राजनीतिक हिस्सेदारी को लेकर पार्टी के कई नेताओं में असहजता देखी जा रही है। समीर सत्तार का निर्दलीय नामांकन भी इसी नाराजगी का परिणाम माना जा रहा है।
सत्तार की बगावत महायुति के लिए खतरे की घंटी
इस दौरान सत्तार ने एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत भी दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें भी लगता है कि दोनों को एक साथ आने पर विचार करना चाहिए। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अब्दुल सत्तार के खुले आरोप और समीर सत्तार की बगावत महायुति के भीतर बढ़ती असहमति का संकेत हैं। यदि यह असंतोष और बढ़ता है तो आगामी स्थानीय निकाय तथा विधानसभा राजनीति में गठबंधन को नुकसान उठाना पड़ सकता है। भाजपा और शिंदे गुट के बीच सीट बंटवारे को लेकर उपजा यह विवाद महाराष्ट्र की राजनीति में नई चर्चा का विषय बन गया है।

अन्य समाचार