सामना संवाददाता / मुंबई
भाजपा ने आखिरकार अपने पुराने और समर्पित कार्यकर्ता डॉ. राजीव पोतदार को विधान परिषद चुनाव के लिए उम्मीदवार घोषित कर दिया है। इस पैâसले को केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की उस सार्वजनिक टिप्पणी से जोड़कर देखा जा रहा है, जिसमें उन्होंने पार्टी के निष्ठावान कार्यकर्ताओं की उपेक्षा पर चिंता जताई थी।
नागपुर में एक कार्यक्रम के दौरान गडकरी ने पार्टी के पुराने और कर्मठ कार्यकर्ताओं को पर्याप्त सम्मान और अवसर नहीं मिलने का मुद्दा उठाया था। उन्होंने डॉ. राजीव पोतदार का उदाहरण देते हुए कहा था कि कई बार अच्छे और समर्पित कार्यकर्ता ‘घर की मुर्गी दाल बराबर’ बन जाते हैं, जबकि बाहर से आनेवाले लोगों को अधिक महत्व दिया जाता है। अपनी बात को प्रभावी ढंग से रखते हुए उन्होंने यह भी कहा था कि बाहर से आए लोग ‘सावजी चिकन मसाला’ की तरह आकर्षण का केंद्र बन जाते हैं।
गडकरी की इस टिप्पणी के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई थी कि भाजपा नेतृत्व को पुराने और निष्ठावान कार्यकर्ताओं को उचित प्रतिनिधित्व देना चाहिए। अब मुख्यमंत्री द्वारा डॉ. राजीव पोतदार को विधान परिषद का टिकट दिए जाने को उसी दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
