समाज का आईना है युवा वर्ग,
देश की पहचान है युवा वर्ग।
एक बसंती बयार हैं युवक,
खुशहाल समाज के प्राण हैं युवक।
ज़रूरत पड़ने पर आंधी का रेला हैं,
आज़ादी लेने में इसी युवा वर्ग ने
अपने को मृत्यु के मुख में धकेला है।
प्रथम स्वाधीनता संग्राम
इन्हीं युवाओं की देन था।
मंगल पांडे, लक्ष्मीबाई, तात्या टोपे,
चितरंजन, सुभाष और भगत सिंह—सभी युवा ही थे।
अनुशासित युवा देश की पवित्र भूमि है,
जो देती है लहलहाती, सुखद फसलें।
ज्ञान, विज्ञान, साहित्य और अनुसंधान
सभी समाज में पनपते हैं।
हो अनुशासन से बाहर यही युवक,
तो नशेड़ी, शराबी और अपराधी बनते हैं।
रखना होगा स्वयं पर संयम इनको।
युवक हैं राष्ट्र के सुनहरे मेघ,
मरुधरा की बुझी प्यास मिटाकर नई समृद्धि लाते हैं।
युवाओं! एक हाथ में कलम, दूसरे में मशाल पकड़ो,
तुम अशिक्षा को हराओ, अंधविश्वासों को जला दो।
भक्ति, प्रेम, ज्ञान और विश्वास का दीपक बन,
युवकों! भारत का सुंदरतम इतिहास लिख दो।
— बेला विरदी
यमुना नगर (हरियाणा)
