-विश्व प्रसिद्ध मलमास मेला (राजगृह) राजगीर एक नजर-ई हिमांशु शेखर, साहित्यकार, सामाजिक कार्यकर्ता की कलम से
प्रस्तुति -अनिल मिश्र
भारत प्राचीन काल से ही धर्म, अध्यात्म, संस्कृति और तीर्थ परंपराओं का केंद्र रहा है। यहां समय-समय पर ऋषि-मुनियों, संतों और महापुरुषों ने जन्म लेकर मानव समाज को ज्ञान और आध्यात्मिकता का मार्ग दिखाया है। भारत में अनेक धार्मिक पर्व, उत्सव और मेले आयोजित होते हैं, जो न केवल धार्मिक आस्था के प्रतीक हैं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक एकता को भी सुदृढ़ करते हैं। इन्हीं पावन आयोजनों में बिहार के नालंदा जिले स्थित ऐतिहासिक नगरी(राजगृह) राजगीर का विश्व प्रसिद्ध मलमास मेला विशेष महत्व रखता है। यह मेला प्रत्येक तीन वर्ष पर आयोजित होता है और लाखों श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है।हिंदू पंचांग में सूर्य वर्ष और चंद्र वर्ष के बीच लगभग 11 दिनों का अंतर होता है। इस अंतर को संतुलित करने के लिए लगभग प्रत्येक तीसरे वर्ष एक अतिरिक्त मास जोड़ा जाता है, जिसे अधिकमास, पुरुषोत्तम मास अथवा मलमास कहा जाता है।ज्योतिषीय दृष्टि से इस मास में सूर्य किसी नई राशि में प्रवेश नहीं करता, अर्थात सूर्य संक्रांति नहीं होती। इसी कारण इसे प्रारंभ में मलमास कहा गया। किंतु पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान विष्णु ने इस मास को अपना नाम प्रदान कर इसे “पुरुषोत्तम मास” का गौरव प्रदान किया। तभी से यह महीना अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी माना जाता है।इस मास में जप, तप, दान, व्रत, कथा-श्रवण, भगवद्गीता का पाठ तथा भगवान विष्णु की आराधना का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस अवधि में किए गए धार्मिक कार्यों का फल अनेक गुना बढ़ जाता है। वहीं विवाह, गृह प्रवेश, नए व्यापार की शुरुआत तथा अन्य मांगलिक कार्य इस मास में नहीं किए जाते हैं।राजगीर और मलमास मेले की पौराणिक मान्यता यह है कि राजगीर बिहार की प्राचीन राजधानी रही है। यह नगर पर्वतों, गर्म जलकुंडों, ऐतिहासिक स्थलों तथा धार्मिक परंपराओं के लिए विश्व प्रसिद्ध है। हिंदू मान्यता के अनुसार मलमास के दौरान समस्त 33 करोड़ देवी-देवता स्वर्ग से उतरकर राजगीर में निवास करते हैं। इसी कारण इस अवधि में राजगीर को देवताओं की नगरी कहा जाता है।मान्यता है कि मलमास के दौरान राजगीर के पवित्र कुंडों, विशेषकर ब्रह्मकुंड में स्नान करने से व्यक्ति को समस्त देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है तथा उसके पापों का क्षय होता है। यही कारण है कि देश के विभिन्न राज्यों से लाखों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।
राजगीर का मलमास मेला प्रत्येक तीन वर्ष के अंतराल पर आयोजित होता है। वर्ष 2026 में यह मेला 17 मई से 15 जून तक आयोजित हो रहा है। इस दौरान लाखों श्रद्धालु राजगीर पहुंचकर पवित्र स्नान, पूजा-अर्चना, कथा-श्रवण एवं दान-पुण्य के कार्य करते हैं।
मेले के दौरान शाही स्नान का विशेष महत्व होता है। श्रद्धालु निर्धारित तिथियों पर पवित्र कुंडों में स्नान कर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त करते हैं। संपूर्ण राजगीर धार्मिक अनुष्ठानों, भजन-कीर्तन, प्रवचनों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से गूंज उठता है।राजगीर के गर्म जलकुंड विश्वभर में प्रसिद्ध हैं। इनमें ब्रह्मकुंड सबसे अधिक पवित्र माना जाता है। यह प्राकृतिक गर्म जल स्रोत है, जिसका जल वर्ष भर गर्म रहता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि इस कुंड में स्नान करने से शारीरिक और मानसिक शुद्धि होती है तथा अनेक रोगों से मुक्ति मिलती है। मलमास के अवसर पर हजारों श्रद्धालु प्रातःकाल से ही ब्रह्मकुंड में स्नान करने के लिए लंबी कतारों में खड़े दिखाई देते हैं। तीव्र गर्मी के बावजूद भक्तों का उत्साह कम नहीं होता। स्नान के बाद श्रद्धालु स्वयं को नई ऊर्जा, शांति और आध्यात्मिक आनंद से परिपूर्ण अनुभव करते हैं। मलमास मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह सामाजिक और सांस्कृतिक समरसता का भी प्रतीक है। मेले में विभिन्न राज्यों और समुदायों के लोग एकत्र होकर भारतीय संस्कृति की विविधता और एकता का परिचय देते हैं।
यह मेला स्थानीय व्यापार, हस्तशिल्प, पर्यटन और रोजगार को भी बढ़ावा देता है। मेले के अवसर पर स्थानीय दुकानदारों, कारीगरों, होटल व्यवसायियों और परिवहन सेवाओं को विशेष लाभ प्राप्त होता है। इस प्रकार यह आयोजन क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी सशक्त बनाता है। आज भी राजगीर में पर्यटकों के लिए तांगा की सवारी उपलब्ध है। पर्यावरण की सुरक्षा के लिए तांगा की सवारी बेहद लाभकारी है। ब्रह्मकुंड के साथ विश्व शांति स्तूप (रोपवे के साथ), गिद्धकूट पर्वत, सोन भंडार गुफाएं, वेणु वन, बिंबिसार की जेल और नेचर सफारी व ग्लास ब्रिज पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं।मलमास मेला श्रद्धालुओं के लिए आत्मशुद्धि और ईश्वर से जुड़ने का एक दुर्लभ अवसर प्रदान करता है। राजगीर की पर्वतमालाएं, मंदिर, कुंड और धार्मिक वातावरण व्यक्ति के मन में श्रद्धा और भक्ति का संचार करते हैं। यहां पहुंचकर श्रद्धालु सांसारिक चिंताओं से दूर होकर आध्यात्मिक शांति का अनुभव करते हैं। राजगीर का विश्व प्रसिद्ध मलमास मेला भारतीय धार्मिक आस्था, संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा का अद्भुत संगम है। यह मेला न केवल करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है, बल्कि बिहार की गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत का भी प्रतीक है। मलमास के दौरान राजगीर का वातावरण भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत हो उठता है। अतः यह मेला भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर है, जिसका संरक्षण और प्रचार-प्रसार हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।
