मुख्यपृष्ठस्तंभभोजपुरिया व्यंग्य: आंधी-तूफान रोजई आवत बा जियरा बहुतै डेरवावत बा

भोजपुरिया व्यंग्य: आंधी-तूफान रोजई आवत बा जियरा बहुतै डेरवावत बा

प्रभुनाथ शुक्ल भदोही

हमारा यूपी में जेठ क महीना जुलुम कइले बा। जेठ के दिमाग मा का चल रहल बा हमनी कुछ कह ना सकेला। यहीं मा मलमास लगन बा। हर जगह भजन -कीर्तन, पूजा-पाठ अउरी भगवान भोलेनाथ के रुद्राभिषेक हो रहल बा, आंधी -पानी रुकत नइखे बा। प्रकृति अइसन रूप देखावत बिया कि बड़का-बड़का अधिकारी, इंजीनियर आ नेता सभ के दिमाग चकरा गइल बा। मौसम विभाग रोज चेतावनी जारी करत बा, जिला प्रशासन हाई अलर्ट पर बा, बिजली विभाग अपना टीम के तैयार रखले बा, बाकि जइसे ही आंधी-तूफान के पहिलका झोंका आवेला, सगरी तैयारी तास के पत्ता नियर बिखर जात बा।
कहीं पेड़ गिरत बा, कहीं बिजली के खंभा धराशायी हो जात बा, त कहीं तार टूट के सड़क पर पसरल मिलत बा। लोग सोचेला कि अबकी सरकार पूरा तैयारी कइले बिया, लेकिन प्रकृति शायद ई संदेश देत बिया कि हमरा आगे कवनो तैयारी काम ना आई। आंधी आवते लाखों लोग अंधेरा में डूब जात बा। मोबाइल चार्ज करे खातिर लोग परेशान हो जात बा। इन्वर्टर जवाब दे देला, पंखा बंद हो जाला, आ उमस में लोग रात भर जागे पर मजबूर हो जाला। शहर से लेके गांव तक एके कहानी सुनाई पड़त बा, बिजली कब आई। सबसे मजेदार बात ई बा कि मौसम विभाग के अलर्ट अब जनता खातिर रोजमर्रा के खबर बन गइल बा। मोबाइल खोलीं त चेतावनी, टीवी देखीं त चेतावनी, सोशल मीडिया पर जाइं त चेतावनी। हालत ई बा कि लोग तूफान से कम, अलर्ट से जादे डेराए लागल बा। प्रकृति बार-बार एह बात के एहसास करा रहल बिया कि विकास चाहे कतना हो जाव, इंसान अभी भी प्रकृति के सामने छोट बा। ऊ जब चाहे सड़क रोक सकेली, बिजली गुल कर सकेली, पेड़ गिरा सकेली आ पूरा व्यवस्था के चुनौती दे सकेली। आज जरूरत बा कि खाली अलर्ट जारी करे से काम ना चली। कमजोर पेड़न के समय रहते छंटाई होखे, बिजली व्यवस्था अउरी मजबूत बने, आपदा प्रबंधन के तैयारी जमीन पर दिखाई दे। काहे कि जनता के चिंता खाली मौसम ना, बलुक ओकरा बाद पैदा होखे वाली दिक्कतन से बा। सच त ई बा कि आंधी-तूफान के आगे सरकार, प्रशासन आ बिजली विभाग सभे नतमस्तक नजर आवत बा। प्रकृति के शक्ति के सामने इंसान के तकनीक आजुओ सीमित बा। एहसे सावधानी, सतर्कता आ धैर्य सबसे बड़का हथियार बा।

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