मुख्यपृष्ठस्तंभगजबे है: घूंघट पर अड़ी गृहस्थी!

गजबे है: घूंघट पर अड़ी गृहस्थी!

उमा सिंह

पूरी दुनिया क्या, पूरे ब्रह्मांड में हिंदुस्थानियों जैसा कोई नहीं है। एक तरफ देश महंगाई, बेरोजगारी और शिक्षा जैसी बड़ी चुनौतियों पर बहस कर रहा है। बढ़ती महंगाई के बीच कई घरों में यह चिंता है कि आज क्या पकाएं और क्या खाएं, वहीं दूसरी ओर कुछ घरों में बहस इस बात पर अटकी है कि घूंघट कौन करेगा और कितनी देर तक करेगा। अब हालात ऐसे हैं कि घूंघट भी गृहस्थी का बड़ा मुद्दा बन गया है। रिश्तों की गाड़ी कभी प्यार से चलती है तो कभी अहंकार के स्पीड ब्रेकर पर अटक जाती है। इसी बीच कई अजब-गजब किस्से सामने आते रहते हैं। पति-पत्नी के झगड़ों की कहानियां तो आपने बहुत सुनी होंगी, लेकिन गाजियाबाद से सामने आया एक मामला रिश्तों की दुनिया में नया अध्याय लिखता नजर आता है। यहां विवाद न दहेज का है, न संपत्ति का और न ही किसी बड़े पारिवारिक झगड़े का। मामला घूंघट और बराबरी की जिद पर अटक गया। बताया जाता है कि पति चाहता था कि उसकी पत्नी घर में पारंपरिक तरीके से घूंघट करे। पत्नी ने भी ऐसा जवाब दिया कि मामला चर्चा का विषय बन गया। जब पत्नी को दिन के २४ घंटे घूंघट में रहने की नसीहत दी गई तो उसने कहा, ‘ठीक है, मैं घूंघट में रहूंगी, बशर्तें, आप भी दिन-रात शेरवानी पहनकर ही रहेंगे।’ बस फिर क्या था, गाजियाबाद का यह विवाद देखते ही देखते चर्चा का विषय बन गया। बात तर्क से तकरार तक पहुंची और तकरार बढ़ते-बढ़ते परिवार परामर्श केंद्र तक जा पहुंची। हालांकि, यह कोई अकेला अजीब मामला नहीं है, जो पैâमिली काउंसलिंग सेंटर में पहुंचा हो। इससे पहले भी कई मामलों ने लोगों को चौंकाया है। एक मामला सोशल मीडिया के बढ़ते क्रेज से जुड़ा है, जहां एक परेशान पति ने अपनी पत्नी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। ये सभी मामले भले ही सुनने में लोगों को हास्यास्पद लगें, लेकिन इनके पीछे एक गंभीर सवाल छिपा है कि क्या रिश्ते आदेश और दबाव से चलते हैं या आपसी समझ, सम्मान और विश्वास से? जब पति-पत्नी एक-दूसरे को अपनी पसंद के मुताबिक बदलने की कोशिश करने लगते हैं, तब अक्सर घर की खुशियां सिमटकर अदालतों और परामर्श केंद्रों की फाइलों तक पहुंच जाती हैं।

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