अनिल मिश्र / पटना
बिहार प्रदेश के बोधगया स्थित मगध विश्वविद्यालय अंतर्गत संबद्ध डिग्री कॉलेजों के प्राचार्यों की बैठक गया कॉलेज के सी.वी. रमन भवन में संपन्न हुई। बैठक में उपस्थित संबद्ध डिग्री कॉलेजों के प्राचार्यों ने एकमत से राज्य सरकार एवं मगध विश्वविद्यालय द्वारा पूर्व की बकाया फीस प्रतिपूर्ति राशि का भुगतान किए बिना लड़कियों तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के छात्रों से शिक्षण शुल्क नहीं लेने संबंधी आदेश का विरोध किया। प्राचार्यों ने निर्णय लिया कि बकाया राशि प्राप्त होने तक शिक्षण शुल्क लिया जाएगा तथा राज्य सरकार अथवा मगध विश्वविद्यालय द्वारा संबंधित राशि उपलब्ध कराने के बाद छात्रों के बैंक खातों में शुल्क वापस कर दिया जाएगा।
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा संबद्ध डिग्री कॉलेजों के शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मचारियों की पिछले 40 वर्षों से लंबित वेतनमान एवं पेंशन की मांग अब तक पूरी नहीं की गई है। इसके विपरीत, जिन छात्रों के शिक्षण शुल्क से वहां कार्यरत कर्मचारियों को कामचलाऊ वेतन दिया जाता है, उसे भी बंद करने का प्रयास किया जा रहा है।
इस दौरान उपस्थित प्राचार्यों ने कहा कि वे लड़कियों तथा अनुसूचित जाति एवं जनजाति के छात्रों से शिक्षण शुल्क नहीं लेने के पक्ष में हैं, लेकिन इसके लिए सरकार को संबद्ध डिग्री कॉलेजों को समुचित राशि उपलब्ध करानी होगी। साथ ही सभी संबद्ध डिग्री कॉलेजों के कर्मचारियों को नियमित वेतनमान एवं पेंशन भी प्रदान की जानी चाहिए।
बैठक के अंत में निर्णय लिया गया कि दो दिनों के भीतर मगध विश्वविद्यालय के कुलपति, कुलसचिव एवं छात्र कल्याण अधिष्ठाता (डीन स्टूडेंट्स वेलफेयर) को इस संबंध में स्मारपत्र सौंपा जाएगा। साथ ही एक सप्ताह के भीतर महामहिम राज्यपाल, मुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री को भी ज्ञापन दिया जाएगा।
कार्यक्रम का संचालन ए.एन.एस. कॉलेज के प्राचार्य ओम प्रकाश सिंह ने किया।
बैठक को फैक्टनेव के राज्य उपाध्यक्ष प्रो. राकेश कुमार कानन, मगध विश्वविद्यालय अध्यक्ष प्रो. विजय कुमार मिट्ठू, प्राचार्य अशोक कुमार सिंह, डॉ. लालदेव यादव, प्रो. अमरेंद्र कुमार सिंह, प्रो. संजय कुमार यादव, प्रो. सुनील कुमार, प्रो. संजय पांडेय, प्रो. शशि भूषण कुमार, प्रो. डॉ. अनिल कुमार सिन्हा, प्रो. अखिलेश प्रसाद सिंह सहित दर्जनों प्राचार्यों ने संबोधित किया और अपने विचार रखे।
