मुख्यपृष्ठनए समाचारमुंबई मनपा की मनमानी...टेंडर को दरकिनार कर सीधे बांटे करोड़ों के ठेके!

मुंबई मनपा की मनमानी…टेंडर को दरकिनार कर सीधे बांटे करोड़ों के ठेके!

-बिना टेंडर ३ करोड़ के कॉन्ट्रैक्ट मंजूर

-बाहरी एजेंसियों को सीधे काम देने पर उठे सवाल

द्रुप्ति झा / मुंबई

देश की सबसे अमीर मनपा एक बार फिर वित्तीय पैâसलों में पारदर्शिता की कमी को लेकर विवादों के घेरे में है। सिटिजन एंगेजमेंट और इंप्रâास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के नाम पर मनपा की स्थायी समिति ने नियमों को शिथिल करते हुए बिना किसी टेंडिंरग प्रोसेस के सीधे बाहरी एजेंसियों को रु.३ करोड़ के परामर्श अनुबंध सौंपने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। प्रशासन ने दहिसर ट्रांजिट हब प्रोजेक्ट के लिए आईआईटी बॉम्बे को रु.५५ लाख और पार्टिसिपेट मुंबई अभियान के तकनीकी-प्रबंधन सलाहकार के रूप में बहुराष्ट्रीय कंपनी अर्नस्ट एंड यंग को नियुक्त करने का पैâसला किया है। नियमों को ताक पर रखकर सीधे की गई इन नियुक्तियों ने मनपा की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मनपा का नियमों के साथ खिलवाड़
सार्वजनिक धन के उपयोग में निष्पक्षता और सही कीमत सुनिश्चित करने के लिए टेंडर प्रक्रिया अनिवार्य होती है। लेकिन मनपा प्रशासन ने विशेष छूट का हवाला देकर इस मानक प्रक्रिया को दरकिनार कर दिया। यह विवाद ऐसे समय में आया है जब कुछ ही दिनों पहले विभिन्न राजनीतिक दलों के पार्षदों ने मनपा के अपने आंतरिक विभागों को नजरअंदाज करने की प्रवृत्ति पर नाराजगी जताई थी। सवाल यह उठाया जा रहा है कि जब मनपा के पास खुद का भारी-भरकम प्रशासनिक अमला, इंजीनियर और योजना विशेषज्ञ मौजूद हैं, तो छोटी-छोटी पहलों और पैâक्ट-चेकिंग के लिए प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंट्स पर जनता की गाढ़ी कमाई क्यों लुटाई जा रही है?
यह पहली बार नहीं है जब मनपा ने ऐसी मनमानी की है। हाल ही में मनपा ने रु३०,००० करोड़ से अधिक की जल अवसंरचना परियोजनाओं के लिए भी एक ही कंसल्टेंट नियुक्त करने के पैâसले का बचाव किया था, जिससे लगातार यह संदेश जा रहा है कि मनपा टेंडिंरग के जरिए मिलने वाली प्रतिस्पर्धा से बचना चाहती है।
अपने विशेषज्ञ छोड़, बाहरी सलाहकारों पर मेहरबानी!
मनपा के पास इंजीनियरों और योजना विशेषज्ञों की बड़ी टीम होने के बावजूद छोटी परियोजनाओं और फैक्ट चेकिंग के लिए बाहरी कंसल्टेंट्स पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इससे पहले ३० हजार करोड़ रुपये की जल अवसंरचना परियोजनाओं के लिए भी एक ही सलाहकार नियुक्त करने के फैसले पर विवाद खड़ा हो चुका है।

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