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पुलिस ने ही लूट लिया ‘फडणवीस’ का खजाना!..६.५ करोड़ रुपए का लगाया चूना

– गृह मंत्रालय के नाकाम सिस्टम पर सवाल बरकरार
– सैलरी घोटाले में पूर्व अफसर गिरफ्तार

फिरोज खान / मुंबई

जिस पुलिस पर कानून और सरकारी खजाने की हिफाजत की जिम्मेदारी है, उसी महकमे में फर्जी पुलिसकर्मियों के नाम पर ६.५ करोड़ रुपए का खेल सामने आया है। ‘भूत पुलिसकर्मियों’ की फर्जी आईडी बनाकर वेतन निकाला गया। अब सवाल है कि इतने साल तक गृह विभाग और पुलिस प्रशासन की निगरानी आखिर कहां थी? ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि महायुति सरकार यानी `फडणवीस’ सरकार के खजाने को उनकी ही पुलिस ने लूट लिया है। इस मामले में मुंबई पुलिस में सैलरी के नाम पर करोड़ों का घोटाला मामले में एक पूर्व प्रशासनिक अधिकारी को गिरफ्तार किया है। पुलिस अफसर अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर सरकारी पैसों की डवैâती करता रहा और गृह मंत्रालय सोता रहा। देवेंद्र फडणवीस का गृह मंत्रालय अगर अलर्ट रहता तो सरकार को ६.५ करोड़ रुपए का चूना नहीं लगता। इस तरह की भयंकर लापरवाही ने गृह मंत्रालय के नाकाम सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
नौकरी में नहीं, फिर भी हर महीने मिलती रही सैलरी
पुलिस सैलरी स्वैâम की जांच कर रही क्राइम ब्रांच ने नार्थन रीजनल डिविजन ऑफिस के एक पूर्व एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर को गिरफ्तार किया है। सूत्रों के मुताबिक, कुछ पुलिस स्टेशन और पुलिस यूनिट्स में `भूत पुलिसकर्मी’ बनाए गए थे। यानी जो नौकरी में हैं ही नहीं, जो रिटायर हो चुके हैं, उनके नाम पर हर महीने मोटी सैलरी निकाली जाती थी। ये पैसा सीधे कुछ चुनिंदा बैंक खातों में जमा होता था।
मुंबई पुलिस का ‘भूत’ गैंग!
मुंबई पुलिस के सैलरी स्कैम में ६.५ करोड़ रुपए की हेरा फेरी ने गृह विभाग की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस के १० भूतिया कर्मचारियों को सैलरी के तौर पर करीब ६.५ करोड़ रुपए दिए गए थे। क्राइम ब्रांच की यूनिट १२ ने रामकिशन गणेश गोस्वामी (६१) को गिरफ्तार किया है, पुलिस ने इस स्वैâम में शामिल पांच और कर्मचारियों की पहचान की है, जिनमें एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर नागेश तलवडेकर, क्लर्क विजय चव्हाण, अजय राठौड़ और सीनियर क्लर्क अमोल मेश्राम शामिल हैं, जिन्हें फरार आरोपी दिखाया गया है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक गोस्वामी, जो कथित धोखाधड़ी के समय उत्तरी क्षेत्रीय डिविजन में एक प्रशासनिक अधिकारी और निकासी एवं वितरण अधिकारी के रूप में काम कर रहे थे। पुराने सर्विस सिस्टम से नए सिस्टम में कर्मचारियों के ट्रांसफर के दौरान सैलरी पेमेंट में गड़बड़ी का पता चलने के बाद जांच का आदेश दिया गया था। प्रâॉड दिसंबर २०१९ और सितंबर २०२० के बीच हुआ था। जांच में पता चला कि १० नकली सर्विस आईडी ऐसे लोगों के नाम पर बनाई गई थीं जो पुलिस वाले नहीं थे। पुलिस के मुताबिक, बाद में इन नकली कर्मचारियों के नाम पर सैलरी बिल तैयार किए गए और उन्हें मंजूरी दी गई। ६.४१ करोड़ रुपए की ज्यादा सैलरी एक्सिस बैंक के जरिए गैर-पुलिस कर्मचारियों के १६३ बैंक अकाउंट में ट्रांसफर की गई।

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