सामना संवाददाता / मुंबई
महाराष्ट्र में तेंदुओं के बढ़ते हमलों ने सरकार और वन विभाग की चिंता बढ़ा दी है। इंसानी बस्तियों और खेतों में तेंदुओं की बढ़ती मौजूदगी के बीच अब तेंदुओं की संख्या नियंत्रित करने के लिए नसबंदी अभियान को युद्धस्तर पर लागू करने की तैयारी शुरू हो गई है। वनमंत्री गणेश नाईक ने इस संबंध में सकारात्मक निर्णय लेने का आश्वासन दिया है।
विधायक सत्यजीत तांबे ने वनमंत्री गणेश नाईक से मुलाकात कर संगमनेर सहित राज्य के तेंदुआ प्रभावित क्षेत्रों की गंभीर स्थिति से अवगत कराया। उन्होंने मांग की कि तेंदुआ नसबंदी की नीति को केवल अस्थायी उपाय के रूप में न देखते हुए राज्य के सभी तेंदुआ हॉटस्पॉट क्षेत्रों में तेजी से लागू किया जाए।
तांबे के मुताबिक, अहिल्यानगर, नासिक और पुणे जिलों में तेंदुओं के हमलों में छोटे बच्चों, किसानों और महिलाओं की जान जा चुकी है। अकेले अहिल्यानगर जिले में जनवरी २०२५ से जुलाई २०२६ के बीच तेंदुए के हमलों में नौ लोगों की मौत हुई है। इस दौरान वन विभाग ने पिंजरे लगाकर ३५ तेंदुओं को पकड़ा, लेकिन इसके बावजूद तेंदुओं की बढ़ती गतिविधियां चिंता का विषय बनी हुई हैं।
तेंदुओं की बढ़ती संख्या और उनके मानव बस्तियों के आसपास बढ़ते विचरण से ग्रामीण इलाकों में डर का माहौल है। खेतों में काम करने वाले किसानों के साथ-साथ छोटे बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ी है। तेंदुए अब किसानों के पशुधन को भी निशाना बना रहे हैं, जिससे ग्रामीणों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
तेंदुआ बाहुल्य क्षेत्रों में युद्धस्तर पर हो कार्रवाई
सत्यजीत तांबे ने वनमंत्री से कहा कि केवल तेंदुओं को पकड़कर दूसरे स्थानों पर ले जाना स्थायी समाधान नहीं है। तेंदुओं की बढ़ती संख्या को नियंत्रित करने के लिए वैज्ञानिक तरीके से दीर्घकालीन नीति लागू करने की आवश्यकता है। उन्होंने तेजी से नसबंदी अभियान शुरू करने की मांग की। वनमंत्री गणेश नाईक ने इस मांग पर सकारात्मक निर्णय लेते हुए कर्मचारियों को तुरंत एक्शन में आने का आदेश दिया है।
