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जंतर-मंतर पर जेन जी `सैलाब’… धर्मेंद्र प्रधान दें इस्तीफा!

-एक सुर में उठी मांग

-दीपके बोले, ये तो बस ट्रेलर है

-मोदी सरकार के खिलाफ गुस्से में युवा

सामना संवाददाता / नई दिल्ली

मोदी सरकार के खिलाफ युवाओं का गुस्सा अब सड़कों पर फूट पड़ा है। कल दिल्ली के जंतर-मंतर में जेन जी का `जन सैलाब’ देखने को मिला। यहां जुटे जेन जी के हजारों युवाओं ने एक सुर में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जोरदार हुंकार भरी। प्रदर्शनकारियों ने सरकार पर युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने का आरोप लगाते हुए कहा कि शिक्षा और रोजगार के मुद्दों पर अब जवाबदेही तय करनी होगी। जंतर-मंतर पर हुआ यह प्रदर्शन मुख्य रूप से नीट-यूजी पेपर लीक विवाद और सीबीएसई, सीयूईटी तथा एसएससी जीडी जैसी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ आयोजित किया गया। जंतर-मंतर पर उमड़ा यह जनसैलाब साफ संकेत दे रहा है कि युवाओं का आक्रोश अब राजनीतिक चुनौती का रूप लेता जा रहा है।
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने शनिवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर अपना पहला बड़ा प्रदर्शन किया। इसमें पार्टी के संस्थापक अभीजीत दीपके भी शामिल हुए। इसके अलावा पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी प्रदर्शन में शामिल होने आए। प्रदर्शन में दिल्ली समेत बाहरी राज्यों से भी लोग जुटे। इस दौरान `शिक्षा मंत्री इस्तीफा दो’ के नारे लगाए गए और यही आज के प्रदर्शन की मुख्य मांग रही। कॉकरोच जनता पार्टी का कहना है कि यह आंदोलन देशभर में तमाम तरह की परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर उठ रहे सवालों के खिलाफ है। अभिजीत शनिवार सुबह करीब ७:४५ बजे अमेरिका से दिल्ली पहुंचे। हालांकि वे एयरपोर्ट से लगभग एक घंटे बाद बाहर आए। एयरपोर्ट से बाहर निकलते समय उन्होंने डॉ. भीमराव आंबेडकर की एक पुस्तक हाथ में उठा रखी थी, जिसे वे अपने आंदोलन का प्रतीक बता रहे हैं। सीजेपी का आरोप है कि लगातार सामने आ रही परीक्षा संबंधी गड़बड़ियों ने लाखों छात्रों और अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित किया है। पार्टी शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करने और परीक्षा प्रक्रिया में व्यापक सुधार की मांग कर रही है।
क्या हैं `कॉकरोच’ की ५ मांगें
-शिक्षा मंत्री का इस्तीफा
-निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था
-डिजिटल शिक्षा में सुधार
-छात्रों का मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान
-मणिपुर में सामान्य शिक्षा
केवल छात्र ही नहीं, पैरेंट्स भी हुए शामिल
इस आंदोलन में केवल छात्र ही नहीं, बल्कि उनके माता-पिता और अभिभावक भी बड़ी संख्या में शामिल हुए। उनका दर्द और चिंताएं छात्रों से अलग नहीं थीं। प्रदर्शन में शामिल माता-पिता ने साझा किया कि बच्चों की परीक्षाओं की अनिश्चितता के कारण पूरा परिवार भारी मानसिक तनाव से गुजर रहा है।

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