-एनसीपी नेता रोहिणी खडसे ने उठाए गंभीर सवाल
सामना संवाददाता / मुंबई
पुणे में आयोजित कथित पार्टी पर पुणे पुलिस की कार्रवाई को लेकर अब राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की प्रदेश महिला अध्यक्ष ने सरकार और पुणे पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि कार्रवाई में दोहरा मापदंड अपनाया गया है और प्रभावशाली लोगों के परिजनों को बचाने की कोशिश की जा रही है।
रोहिणी खडसे ने पूछा कि जब पार्टी स्थल पर कुल १५६ लोग मौजूद थे, तो केवल ७८ लोगों के खिलाफ ही मामला दर्ज क्यों किया गया? बाकी ७८ लोगों को किस आधार पर छोड़ दिया गया? उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इनमें किसी मंत्री, विधायक, सांसद या सत्ता से जुड़े प्रभावशाली लोगों के बेटे-बेटियां शामिल थीं, जिन पर कार्रवाई से परहेज किया गया?
उन्होंने कहा कि इससे पहले प्रांजल प्रकरण में कुछ लोगों के एकत्र होने को ही ‘रेव पार्टी’ बताकर सभी को हिरासत में लिया गया था और मेडिकल जांच कराई गई थी। लेकिन तुलापुर मामले में केवल २९ लोगों की जांच की गई। यदि पुलिस का रवैया निष्पक्ष है, तो दोनों मामलों में अलग-अलग मानदंड क्यों अपनाए गए?
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि छत्रपति संभाजी महाराज की स्मृतियों से जुड़े तुलापुर जैसे ऐतिहासिक स्थल पर, वह भी छत्रपति शिवाजी महाराज के राज्याभिषेक दिवस के अवसर पर, ऐसी पार्टी आयोजित करने की अनुमति आखिर दी ही क्यों गई? इसके लिए गृह विभाग और राज्य सरकार को जवाब देना चाहिए। रोहिणी खडसे ने कहा कि पूरे प्रकरण से ऐसा प्रतीत होता है कि कानून का इस्तेमाल सभी के लिए समान रूप से नहीं किया जा रहा है। यदि आम लोगों के मामलों में कठोर कार्रवाई होती है, तो प्रभावशाली परिवारों से जुड़े लोगों के मामलों में भी वही नियम लागू होने चाहिए।
रोहिणी के गंभीर सवाल
खडसे ने आरोप लगाया कि प्रांजल मामले में पुलिस और प्रशासन की ओर से वीडियो और सूचनाएं मीडिया तक पहुंचाई गर्इं, जिससे मीडिया ट्रायल हुआ। वहीं तुलापुर मामले में न तो कार्रवाई का कोई वीडियो सामने आया और न ही पार्टी की अनुमति से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक किए गए। उन्होंने कहा कि पुलिस दावा कर रही है कि पार्टी को अनुमति प्राप्त थी, लेकिन अब तक उसका कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया है। छत्रपति शिवाजी महाराज के राज्याभिषेक दिवस के अवसर पर ऐसी पार्टी की अनुमति क्यों दी गई?
