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रांची में छात्र आंदोलन को तेज करने के लिए भाजपा धरना नहीं दे रही थी, बल्कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की हत्या की साजिश रची थी : इरफान अंसारी, स्वास्थ्य मंत्री, झारखंड सरकार

अनिल मिश्र / रांची

झारखंड की राजधानी रांची में सोमवार को 17 दिनों से जेपीएससी परीक्षा पेपर लीक और भर्ती परीक्षा में कथित धांधली के खिलाफ छात्रों द्वारा किए जा रहे आंदोलन एवं छात्रों द्वारा मुख्यमंत्री आवास और विधानसभा घेराव को लेकर झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने राजधानी रांची में भारतीय जनता पार्टी पर एक बहुत बड़ा आरोप लगाया है।
आज मंगलवार को झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी के विधायकों ने सोमवार को किए गए धरना-प्रदर्शन को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की हत्या करने की साजिश बताया और कहा कि इस दौरान मुख्यमंत्री बाल-बाल बच गए। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि विपक्षी विधायकों ने जानबूझकर विधानसभा की जगह मुख्यमंत्री आवास में धरना दिया, जिससे राज्य के आदिवासी मुख्यमंत्री की सुरक्षा खतरे में पड़ गई। उन्होंने कहा कि अगर इस दौरान कुछ अनहोनी हो जाती तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होती।
इसके अलावा, राज्य के स्वास्थ्य मंत्री ने सोमवार को छात्रों के विधानसभा मार्च के दौरान उन पर किसी तरह के लाठीचार्ज होने से भी इनकार किया है। इरफान अंसारी ने मंगलवार को विधानसभा परिसर में मीडिया से बात करते हुए कहा, “कल हमारे लोकप्रिय मुख्यमंत्री जी बाल-बाल बच गए। सदन तो यहां चल रहा है, लेकिन भारतीय जनता पार्टी के विधायकों ने कल मुख्यमंत्री आवास में धरना दिया। वो धरना नहीं था, वो मुख्यमंत्री की हत्या करने का प्रयास था। एक राज्य का आदिवासी मुख्यमंत्री अगर सड़क किनारे रहता है, सुरक्षा नहीं है, वहां पर आप धरना दिए, मान लीजिए अगर कोई दीवार फांदकर कूद जाता, तो वहां पर मुख्यमंत्री थे, उनकी पत्नी थी और उनके बच्चे थे, अगर कुछ हो जाता तो उसका जिम्मेदार कौन होता?”
इस बीच, इरफान अंसारी ने छात्रों पर लाठीचार्ज नहीं होने का दावा किया और कहा कि उल्टा कल पुलिसवालों ने युवाओं से मार खाई है। उन्होंने कहा, “शांतिपूर्वक आंदोलन करने का अधिकार सबको है, लेकिन कल जो हुआ, हम लोग मार खाते रहे, हमारी पुलिस मार खाती रही, लेकिन हम लोगों ने युवाओं पर कोई कार्रवाई नहीं की। आप लोगों ने देखा होगा, एक बैरियर पार किया, दो बैरियर पार किया, तीन, चार, पांच, छह, सात, आठ, उसके बाद भी हम मार खाते रहे। क्यों? क्योंकि वो हमारे बच्चे हैं, वो हमारे युवा हैं। हम लोग बंदूक-गोली पर विश्वास नहीं करते हैं, हम लोग वार्ता पर विश्वास करते हैं, रास्ता निकलेगा। आज देखिए, अगर हमारा युवा विधानसभा तक आ गया तो इसका मतलब क्या है? हम लोग मार खाए, हम लोग कोई कार्रवाई नहीं किए।”

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