मुख्यपृष्ठनए समाचारअपने बेटों के करियर के लिए दादा गुट में भिड़े दो दिग्गज!

अपने बेटों के करियर के लिए दादा गुट में भिड़े दो दिग्गज!

-भुजबल-तटकरे आमने-सामने

-राज्यसभा टिकट पर बढ़ी तकरार

सामना संवाददाता / मुंबई

दादा गुट में राज्यसभा सीट को लेकर उठे विवाद ने अब नए राजनीतिक संकेत देने शुरू कर दिए हैं। उप मुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के राज्यसभा से इस्तीफे के बाद खाली हुई सीट पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और पार्टी ने वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल के करीबी राजेंद्र जैन को उम्मीदवार बनाया है। इस पैâसले ने पार्टी के भीतर चल रही नाराजगी को खुलकर सामने ला दिया है। खासकर वरिष्ठ नेता छगन भुजबल की प्रतिक्रिया ने यह संकेत दिया है कि पार्टी के दो बड़े नेता अब अपने-अपने राजनीतिक उत्तराधिकारियों को स्थापित करने की लड़ाई में आमने-सामने दिखाई दे रहे हैं।
राज्यसभा सीट के लिए छगन भुजबल का नाम सबसे आगे माना जा रहा था। राजनीतिक गलियारों में चर्चा थी कि भुजबल राज्यसभा जाने के इच्छुक थे और इसके बदले अपने भतीजे समीर भुजबल को मंत्रिमंडल में जगह दिलाने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन पार्टी नेतृत्व और भाजपा के शीर्ष स्तर पर सहमति न बनने के बाद उनका दावा खारिज हो गया। इसके बाद भुजबल का बयान आया कि दूसरों के बच्चों को जो न्याय मिलता है, वही मुझे भी मिलना चाहिए, मेरे बच्चों को भी राजनीति में स्थापित करने से परहेज क्यों? यह बयान राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया।
चुनाव जीतकर बने जनप्रतिनिधि
प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे ने याद दिलाया कि वह स्वयं, उनकी बेटी और अब उनके पुत्र अनिकेत तटकरे भी चुनाव जीतकर जनप्रतिनिधि बने हैं। तटकरे का यह बयान राजनीतिक तौर पर भुजबल को जवाब माना जा रहा है।
दादा गुट में आंतरिक असंतोष
एक तरफ छगन भुजबल अपने परिवार के लिए राजनीतिक अवसर चाहते हैं तो दूसरी ओर तटकरे परिवार पहले से ही पार्टी में मजबूत पकड़ बनाए हुए है। भुजबल का पार्टी में योगदान हमेशा सम्मानित रहा है। फिर भी भुजबल की नाराजगी और तटकरे की प्रतिक्रिया ने यह स्पष्ट कर दिया है कि दादा गुट के भीतर सब कुछ सामान्य नहीं है।

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