-महायुति की ‘परसेंटेज सरकार’
-ठेकेदारों के विस्फोटक खुलासे से महाराष्ट्र में मचा सियासी भूचाल
सुनील ओसवाल / मुंबई
महाराष्ट्र में भ्रष्टाचारमुक्त शासन का दावा करने वाली महायुति सरकार के सामने अब ठेकेदारों ने ऐसा आईना खड़ा कर दिया है, जिसने सत्ता और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कोल्हापुर में आयोजित राज्य स्तरीय ठेकेदार महासम्मेलन में यवतमाल जिला ठेकेदार कल्याण संघ के अध्यक्ष प्रवीण उंबरकर ने खुले मंच से कथित ‘परसेंटेज सिस्टम’ का जो खुलासा किया, उसकी गूंज अब पूरे राज्य में सुनाई दे रही है।
उंबरकर ने आरोप लगाया कि सरकारी काम हासिल करने के लिए सबसे पहले १० प्रतिशत हिस्सा जनप्रतिनिधियों को देना पड़ता है। इसके बाद १८ प्रतिशत जीएसटी, फिर अधिकारियों और संबंधित तंत्र के खर्च के नाम पर १० प्रतिशत और बिलों के भुगतान के लिए अलग से ५ प्रतिशत तक देना पड़ता है। उनका सवाल था कि जब परियोजना की आधी से अधिक राशि विभिन्न स्तरों पर बंट जाती है, तब बची हुई रकम में गुणवत्तापूर्ण काम वैâसे संभव है?
ठेकेदार ने लगाया सिस्टम पर आरोप
उंबरकर ने कहा कि पहले ठेके सुशिक्षित बेरोजगार अभियंताओं, पंजीकृत ठेकेदारों और श्रमिक संस्थाओं को नियमानुसार मिलते थे, लेकिन अब कामों का वितरण और भुगतान एक कथित ‘लॉबी सिस्टम’ के जरिए नियंत्रित किया जा रहा है। जिसमें सत्ता से निकटता रखने वाले कुछ लोगों को ही प्राथमिकता दी जा रही है।
९५ हजार करोड़ रुपए वर्षों से लंबित
ठेकेदारों का दावा है कि राज्य में सार्वजनिक निर्माण, जलापूर्ति और जलसंधारण विभागों के करीब ८५ से ९६ हजार करोड़ रुपए के बिल वर्षों से लंबित हैं। अकेले यवतमाल जिले में लगभग १,३०० करोड़ रुपए का भुगतान अटका हुआ है। ऐसे में हजारों ठेकेदार आर्थिक संकट में फंस गए हैं। बैंक की किश्तें चुकाना भी मुश्किल हो गया है।
ठेकेदारों की सरकार को चेतावनी
सम्मेलन में ठेकेदारों द्वारा यह आरोप भी लगाया गया कि चुनावी लाभ को ध्यान में रखकर पर्याप्त बजटीय प्रावधान के बिना बड़े पैमाने पर कामों को मंजूरी दी गई। दूसरी ओर विभिन्न लोकलुभावन योजनाओं पर सरकारी खजाना खर्च होने से विकास कार्यों के भुगतान के लिए धन की कमी पैदा हो गई। इसका खामियाजा ठेकेदारों, मजदूरों और निर्माण क्षेत्र से जुड़े लाखों परिवारों को भुगतना पड़ रहा है। महासम्मेलन में ठेकेदारों ने चेतावनी दी कि जब तक पुराने बकाए का भुगतान नहीं किया जाता, तब तक राज्य में नई निविदाओं में भाग लेने पर पुनर्विचार किया जाएगा।
