मुख्यपृष्ठस्तंभपानी के लिए तरसेगा भारत!

पानी के लिए तरसेगा भारत!

-मुंबई और दिल्ली की स्थिति चिंताजनक

-अर्थव्यवस्था पर भी मंडराया खतरा

-मूडीज रेटिंग्स की रिपोर्ट में दी गई चेतावनी

भारत आने वाले वर्षों में गंभीर जल संकट का सामना कर सकता है। मूडीज रेटिंग्स ने अपनी रिपोर्ट में चेतावनी दी है कि तेजी से घटती जल उपलब्धता देश की आर्थिक वृद्धि, सामाजिक स्थिरता और साख के लिए बड़ा खतरा बन सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक, बढ़ती आबादी, औद्योगीकरण, शहरीकरण, भूजल के अत्यधिक दोहन और जलवायु परिवर्तन के कारण भारत में पानी की मांग और उपलब्धता के बीच अंतर लगातार बढ़ रहा है।
मूडीज ने जून २०२४ में जारी अपने आकलन में कहा था कि भारत में प्रति व्यक्ति औसत वार्षिक जल उपलब्धता वर्ष २०२१ के १,४८६ घनमीटर से घटकर २०३१ तक करीब १,३६७ घनमीटर रह सकती है। इससे कृषि उत्पादन प्रभावित होने, खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ने तथा बिजली, कोयला, इस्पात और अन्य जल-आधारित उद्योगों पर दबाव बढ़ने की आशंका है।
इस चेतावनी के बीच देश के दो सबसे बड़े महानगरों मुंबई और दिल्ली की स्थिति चिंता बढ़ा रही है। मुंबई को पानी देने वाली सात झीलों में २४ जून २०२६ को उनकी कुल क्षमता का केवल ७.९४ प्रतिशत पानी बचा था। इससे पहले अधिकारियों ने उपलब्ध भंडार को लगभग ४० दिनों के लिए पर्याप्त बताया था और जलापूर्ति में कटौती लागू की थी। इसलिए ‘केवल एक महीने का पानी बचा है’ वाला दावा मोटे तौर पर मौजूदा संकट की गंभीरता दर्शाता है, हालांकि यह आंकड़ा प्रतिदिन बदल रहा है।
जलापूर्ति बुरी तरह प्रभावित
दिल्ली के कई इलाकों में भी पानी की आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित है। दरीयागंज समेत कुछ क्षेत्रों के लोगों ने शिकायत की है कि १० से १५ दिनों से बेहद कम दबाव से पानी आ रहा है, जबकि कई बस्तियों को टैंकर के लिए एक सप्ताह तक इंतजार करना पड़ रहा है। पूरे दिल्ली शहर में लगातार १५-२० दिन पानी न पहुंचने का दावा सही नहीं है, लेकिन कई क्षेत्रों में संकट बेहद गंभीर है। यह स्थिति बताती है कि वर्षा जल-संचयन, भूजल पुनर्भरण, पाइपलाइन रिसाव रोकने और जल के पुनर्चक्रण पर तत्काल काम नहीं हुआ तो पानी भविष्य का सबसे बड़ा आर्थिक और सामाजिक संकट बन सकता है।

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