मुख्यपृष्ठस्तंभब्रिटेन के ‘ग्रूमिंग गैंग’ कांड से अमेरिका को भी चेतावनी

ब्रिटेन के ‘ग्रूमिंग गैंग’ कांड से अमेरिका को भी चेतावनी

रिपोर्ट में बच्चों के यौन शोषण पर पुलिस-प्रशासन की दशकों पुरानी विफलताएं उजागर

ब्रिटेन में संगठित गिरोहों द्वारा बच्चियों के यौन शोषण से जुड़े मामलों पर प्रकाशित एक विस्तृत रिपोर्ट ने पुलिस, स्थानीय प्रशासन और सामाजिक संस्थाओं की गंभीर विफलताओं को फिर उजागर किया है। अमेरिकी पत्रकार ब्रायन डॉसन ने इस रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका ने कमजोर बच्चों की सुरक्षा, अपराधियों की पहचान और संस्थागत जवाबदेही को प्राथमिकता नहीं दी तो वहां भी इसी तरह की परिस्थितियां पैदा हो सकती हैं।
ब्रिटिश सरकार द्वारा नियुक्त बैरोनेस लुईस केसी की राष्ट्रीय ऑडिट रिपोर्ट में कहा गया है कि कई शहरों में बच्चियों के साथ लंबे समय तक सामूहिक यौन शोषण होता रहा, लेकिन जिम्मेदार संस्थाएं समय रहते उन्हें बचाने में विफल रहीं। कई पीड़िताओं को असुरक्षित और शोषित बच्चे मानने के बजाय उनके व्यवहार के लिए ही दोषी ठहराया गया। कुछ मामलों में नाबालिग लड़कियों को अपराध का शिकार मानने के बजाय वयस्कों जैसा व्यवहार करने वाला बताया गया। रिपोर्ट के अनुसार, अपराधियों की जातीयता और राष्ट्रीयता से संबंधित आंकड़े नियमित और सही तरीके से दर्ज नहीं किए गए। कई अधिकारियों ने कथित रूप से नस्लवादी कहे जाने या विभिन्न समुदायों के बीच तनाव बढ़ने के डर से अपराधियों की पृष्ठभूमि से जुड़े सवालों की गंभीरता से जांच नहीं की।
हालांकि, रिपोर्ट ने स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध आंकड़े अधूरे और असंगत हैं, इसलिए पूरे ब्रिटेन के लिए किसी एक समुदाय को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा। फिर भी ग्रेटर मैनचेस्टर, दक्षिण यॉर्कशायर और पश्चिम यॉर्कशायर के स्थानीय आंकड़ों में पाकिस्तानी मूल के कुछ पुरुष समूहों की असमान रूप से अधिक मौजूदगी सामने आई। रिपोर्ट का कहना है कि इस तथ्य की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए थी, न कि इसे राजनीतिक या सामाजिक असहजता के कारण नजरअंदाज किया जाना चाहिए था।
ऑडिट में यह भी कहा गया कि ‘ग्रूमिंग गैंग’ की कोई समान सरकारी परिभाषा नहीं होने तथा पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, स्थानीय निकायों और न्याय व्यवस्था के बीच आंकड़ों का तालमेल न होने के कारण पीड़ितों और अपराधियों की वास्तविक संख्या का पता लगाना कठिन है। ब्रिटिश सरकार ने रिपोर्ट की सभी १२ सिफारिशें स्वीकार कर ली हैं। इनमें राष्ट्रीय स्तर पर स्वतंत्र वैधानिक जांच, पुराने बंद मामलों की दोबारा समीक्षा, अपराधियों की जातीयता और राष्ट्रीयता दर्ज करना अनिवार्य बनाना, एजेंसियों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान और बाल यौन शोषण को संगठित अपराध की तरह लेना शामिल है। राष्ट्रीय अपराध एजेंसी के नेतृत्व में एक हजार से अधिक पुराने मामलों की दोबारा जांच भी शुरू की गई है। लंदन, ओल्डहम, ब्रैडफोर्ड और कीघली को नई राष्ट्रीय जांच के शुरुआती केंद्रों में शामिल किया गया है।
अमेरिका के लिए चेतावनी देते हुए डॉसन ने कहा कि प्रवासन, राजनीतिक शुद्धता अथवा सामुदायिक तनाव के भय को बच्चों की सुरक्षा से ऊपर नहीं रखा जाना चाहिए। हालांकि, ब्रिटिश रिपोर्ट सीधे तौर पर अमेरिका में ऐसे अपराधों के पैâलने की पुष्टि नहीं करती। अमेरिका के बारे में दी गई चेतावनी पत्रकार का आकलन है, न कि केसी रिपोर्ट का आधिकारिक निष्कर्ष। इस पूरे प्रकरण का सबसे बड़ा संदेश यही है कि अपराधियों की पहचान या पृष्ठभूमि चाहे कुछ भी हो, प्रशासन को तथ्यों से मुंह नहीं मोड़ना चाहिए। साथ ही किसी अपराधी समूह के आधार पर पूरे धर्म, नस्ल या समुदाय को दोषी ठहराना भी गलत होगा। बच्चों की सुरक्षा, पीड़ितों पर विश्वास और निष्पक्ष जांच ही ऐसे अपराधों से निपटने का प्रभावी रास्ता है।

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