द्रुप्ति झा / मुंबई
मुंबई की जीवनरेखा कही जाने वाली बेस्ट बस सेवा इन दिनों अपने सबसे खराब दौर से गुजर रही है। एक तरफ जहां यात्री बदहाल सेवा, घटती बसों और घटों के लंबे इंतजार से परेशान हैं, वहीं दूसरी तरफ हादसों के बढ़ते आंकड़ों ने आम लोगों के मन में खौफ पैदा कर दिया है। हाल ही में कुर्ला और भांडुप जैसे व्यस्त इलाकों में हुए दर्दनाक हादसों में कई मासूमों की जान चली गई। जांच रिपोर्ट और मुंबई हाई कोर्ट की टिप्पणियों से यह साफ उजागर हुआ है कि ठेके पर रखे जा रहे ड्राइवरों को इलेक्ट्रिक बसों को चलाने की पर्याप्त प्रैक्टिकल ट्रेनिंग ही नहीं दी जा रही है। क्लच और गियर-रहित इन ई-बसों में एक्सीलेटर और ब्रेक के सही संतुलन की जानकारी न होने की वजह से अनुभवहीन चालक हादसों को न्योता दे रहे हैं। इसी बदहाल व्यवस्था और सुरक्षा चिंताओं के बीच, बेस्ट समिति ने मुंबई में लास्ट-माइल कनेक्टिविटी सुधारने का दावा करते हुए १,५०० पीएम ई-ड्राइव इलेक्ट्रिक मिडी बसों के प्रस्ताव को मंजूरी दी है, लेकिन जब तक बेस्ट ठेकेदारों के भरोसे चल रही वेट-लीज व्यवस्था में ड्राइवरों की सख्त और व्यावहारिक ऑन-रोड ट्रेनिंग सुनिश्चित नहीं करती, तब तक मुंबईकरों की जान जोखिम में बनी रहेगी।
कागजों पर योजना, लेकिन धरातल पर सवाल
स्वीकृत योजना के तहत, ग्रीनसेल मोबिलिटी १,०५० ईकेए इलेक्ट्रिक बसें (ऑर्डर का ७० प्रतिशत) आपूर्ति करेगी, जबकि साई ग्रीन ४५० स्विच ईआईवी९ बसें उपलब्ध कराएगी। बसों को २०२६ और २०२७ के दौरान चार चरणों में २२५, ३७५, ४५० और ४५० की संख्याओं में बेस्ट बेड़े में शामिल किया जाएगा और विभिन्न बेस्ट डिपो में तैनात किया जाएगा। सिर्फ नई तकनीक और बसें लाने से यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होगी। बेस्ट प्रशासन को यह समझना होगा कि आधुनिक बसों को संभालने के लिए ट्रेंड ड्राइवरों की जरूरत है।
