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पब्लिक की तकदीर पर महंगाई की लकीर…महंगी हो गई रोजमर्रा की रसोई और ‘खीर’!.. एक महीने में चीनी और चावल के दाम ५ प्रतिशत तक चढ़े

सामना संवाददाता / नई दिल्ली

त्योहारी मौसम की शुरुआत से पहले ही महंगाई ने आम आदमी की रसोई में दस्तक दे दी है। खीर से लेकर चाय तक में इस्तेमाल होने वाली चीनी और रोज की थाली का सबसे जरूरी अनाज चावल महंगा हो गया है। कमजोर और अनियमित मानसून, जमाखोरी की आशंका तथा वैश्विक तनाव से बढ़ती लागत ने घर का बजट बिगाड़ना शुरू कर दिया है।
उपभोक्ता मामलों के विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, देशभर में चीनी का औसत खुदरा भाव एक महीने में रु.४७.११ से बढ़कर ३ अगस्त २०२६ को रु.४९.५३ प्रति किलो तक पहुंच गया। यानी एक महीने में कीमत करीब पांच प्रतिशत बढ़ गई। थोक बाजार में चीनी की औसत कीमत रु.४,५९३ प्रति क्विंटल के आसपास पहुंच गई है। एक साल के भीतर चीनी के दाम में करीब ७.६४ प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
सरकार भी मान चुकी है कि चीनी की कीमतों में हालिया उछाल सामान्य मांग और आपूर्ति की स्थिति के अनुरूप नहीं है। खाद्य मंत्रालय के अनुसार कुछ व्यापारियों की जमाखोरी, सट्टेबाजी और बिना वास्तविक माल की आवाजाही के कागजी कारोबार से बाजार में कृत्रिम कमी का माहौल बनाया गया। इसी कारण सरकार ने एक अगस्त से ३० नवंबर तक चीनी व्यापारियों पर स्टॉक रखने की सीमा लागू कर दी है।
कमजोर मानसून ने बढ़ाई चिंता
२०२६ में मानसून के कमजोर रहने की आशंका ने खाद्यान्न बाजार पर दबाव बढ़ा दिया है। बारिश में कमी या लंबे सूखे से धान और गन्ने की पैदावार प्रभावित हो सकती है। खाद्य और र्इंधन की बढ़ती लागत के कारण जून में खुदरा महंगाई के भारतीय रिजर्व बैंक के चार प्रतिशत लक्ष्य से ऊपर जाने का अनुमान भी लगाया गया था।
त्योहार आए नहीं, मिठास पहले ही कड़वी
रक्षाबंधन, जन्माष्टमी, गणेशोत्सव और आगे आने वाले त्योहारों में चीनी और चावल की मांग बढ़ती है। यही वह समय है जब व्यापारी मांग का फायदा उठाकर कीमतें बढ़ा सकते हैं। सरकार ने चीनी पर स्टॉक सीमा तो लगा दी है, लेकिन सवाल यह है कि क्या निगरानी केवल आदेशों तक सीमित रहेगी या जमाखोरों के गोदामों पर वास्तविक कार्रवाई भी होगी? महंगाई का सरकारी आंकड़ा चाहे जितना प्रतिशत बताए, आम परिवार के लिए सच सीधा है—वेतन वही है, लेकिन चाय की चीनी, बच्चों का दूध, त्योहारों की मिठाई और घर की खीर लगातार महंगी होती जा रही है।
चावल ने भी बिगाड़ा थाली का हिसाब
चावल की कीमतों में भी कई बाजारों में पिछले एक महीने के दौरान पांच प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की खबर है। बारिश में देरी और धान की बुवाई प्रभावित होने की आशंका से व्यापारियों ने भविष्य में आपूर्ति कम होने का अनुमान लगाना शुरू कर दिया है। कुछ बाजारों में जमाखोरी की आशंका भी कीमतों को ऊपर धकेल रही है। सरकारी मूल्य निगरानी प्रणाली ५५५ बाजार केंद्रों से चावल, चीनी और अन्य आवश्यक वस्तुओं की दैनिक कीमतें जुटाती है। १७ जुलाई को चावल का अखिल भारतीय औसत खुदरा भाव रु.४४.५६ प्रति किलो और थोक कीमत रु.३,९८५ प्रति क्विंटल दर्ज की गई थी। इसी दिन चीनी का खुदरा भाव रु.४७.९० प्रति किलो था, जो अगस्त की शुरुआत तक और बढ़ गया।

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