सामना संवाददाता /अलीबाग
करीब 84 दिनों तक सड़क पर रुका रहा 205 मीट्रिक टन वजनी विशाल ड्रायर ड्रम आखिरकार तमाम प्रशासनिक और तकनीकी अड़चनों को पार करते हुए आरसीएफ थल एनपीके परियोजना स्थल तक सुरक्षित पहुंच गया। लगभग तीन महीने तक चला यह घटनाक्रम केवल एक भारी मशीन की ढुलाई नहीं, बल्कि देश की महत्वपूर्ण औद्योगिक परियोजनाओं के सामने मौजूद प्रशासनिक चुनौतियों की भी कहानी बन गया।
करीब ₹914.58 करोड़ की लागत से बन रही आरसीएफ की महत्वाकांक्षी एनपीके परियोजना के लिए यह ड्रायर ड्रम अत्यंत महत्वपूर्ण है। 30 मार्च 2026 को यह उपकरण अलीबाग के कारलेखिंड क्षेत्र तक पहुँच गया था, लेकिन सड़क निर्माण, पुराने पुलों पर प्रतिबंध तथा आवश्यक अनुमतियाँ न मिलने के कारण यह वहीं अटक गया।
एक ओर लोक निर्माण विभाग (PWD) ने पुराने पुलों, विशेष रूप से खातडाल पुल पर भारी वाहनों के आवागमन पर रोक लगा रखी थी, तो दूसरी ओर महाराष्ट्र स्टेट इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (MSIDC) मुख्य मार्ग पर कंक्रीट सड़क निर्माण में जुटा हुआ था। नतीजा यह हुआ कि देश के लिए महत्वपूर्ण परियोजना का करोड़ों रुपये का उपकरण खुले मार्ग पर ही खड़ा रह गया।
इस दौरान आरसीएफ, लार्सन एंड टुब्रो (L&T) और एम/एस बाल रोडलाइंस ने संयुक्त रूप से मार्ग सर्वेक्षण, पुलों की क्षमता का परीक्षण, एक्सल लोड विश्लेषण और अनेक तकनीकी प्रस्तुतियां तैयार कर संबंधित विभागों के समक्ष रखीं, लेकिन अनुमति मिलने में लंबा समय लग गया।
दिलचस्प बात यह रही कि जो ड्रायर ड्रम परियोजना के लिए चिंता का विषय बना हुआ था, वही अलीबाग आने वाले पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया। गर्मी की छुट्टियों में हजारों पर्यटक इस विशालकाय वाहन के साथ सेल्फी लेते दिखाई दिए। सोशल मीडिया पर इसके वीडियो, ड्रोन फुटेज और तस्वीरें वायरल होती रहीं और यह पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गया।
आखिरकार महाराष्ट्र के उद्योग मंत्री उदय सामंत के हस्तक्षेप के बाद प्रशासनिक स्तर पर रास्ता साफ हुआ। जिला प्रशासन, पुलिस, PWD, MSIDC तथा अन्य संबंधित विभागों के समन्वय से विशेष अनुमति जारी की गई।
करीब पाँच मीटर ऊंचे इस महाकाय काफिले को सुरक्षित निकालने के लिए रायगढ़ पुलिस ने व्यापक यातायात व्यवस्था की। वहीं MSEB ने पूरे मार्ग पर लगभग सात घंटे का विशेष बिजली बंद रखा ताकि ऊंची विद्युत लाइनों के बीच से यह उपकरण सुरक्षित निकाला जा सके।
कड़ी सुरक्षा व्यवस्था और विभिन्न विभागों के संयुक्त प्रयासों के बाद 23 जून 2026 को यह विशाल ड्रायर ड्रम सफलतापूर्वक आरसीएफ थल परियोजना स्थल पहुंच गया। इस चुनौतीपूर्ण परिवहन कार्य को देश की अग्रणी भारी परिवहन कंपनी एम/एस बाल रोडलाइंस ने अंजाम दिया। उल्लेखनीय है कि इसी कंपनी ने स्वर्गीय बालासाहेब ठाकरे की ऐतिहासिक अंतिम यात्रा के लिए उपयोग किए गए विशेष ट्रेलर प्लेटफॉर्म की भी व्यवस्था की थी।
अब जबकि यह महत्वपूर्ण उपकरण परियोजना स्थल तक पहुंच चुका है, परियोजना से जुड़े अधिकारियों को उम्मीद है कि शेष ओवर डायमेंशनल कार्गो (ODC) उपकरणों की आवाजाही में भविष्य में ऐसी प्रशासनिक बाधाएं नहीं आएंगी, क्योंकि यह परियोजना केवल महाराष्ट्र ही नहीं, बल्कि देश की उर्वरक आत्मनिर्भरता और कृषि विकास से भी सीधे जुड़ी हुई है।
