-क्रेडिट की लड़ाई, बदहाली और मौतों पर सियासत
-मुंबई की दुर्दशा को लेकर फडणवीस-शिंदे आमने-सामने
फिरोज खान / मुंबई
मुंबई महानगरपालिका चुनाव से पहले भाजपा और एकनाथ शिंदे गुट के बीच खुद को ‘इंप्रâामैन’ साबित करने की होड़ मची हुई थी। एक ओर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस तो दूसरी ओर उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे मुंबई की बड़ी-बड़ी आधारभूत परियोजनाओं का श्रेय लेने में जुटे थे। लेकिन जुलाई में मानसून की पहली बड़ी परीक्षा ने दोनों के ‘विकास मॉडल’ पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब मुंबई की बदहाल स्थिति को लेकर दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।
करीब २०० मिमी बारिश ने महायुति सरकार के विकास संबंधी दावों की पोल खोल दी। सत्ता में आने के बाद भाजपा, शिंदे गुट और अजीत पवार गुट ने इंप्रâास्ट्रक्चर को अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि बताया था। कोस्टल रोड, नई मुंबई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, मुंबई ट्रांस हार्बर लिंक (अटल सेतु), नई मुंबई एयरपोर्ट इंपैक्ट नोटिफाइड एरिया और वधवान पोर्ट जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं का श्रेय लेने की होड़ मची रही। लेकिन पहली ही भारी बारिश के बाद शहर की बदहाल तस्वीर सामने आते ही राजनीतिक दल एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालने लगे हैं। पिछले सप्ताह हुई मूसलाधार बारिश के दौरान मुंबई और आस-पास के क्षेत्रों में कम से कम १३ लोगों की मौत हो गई। कई लोगों की जान पेड़ गिरने की घटनाओं में गई, जबकि जलभराव और अन्य हादसों ने भी जनजीवन को प्रभावित किया। लगभग २०० मिमी बारिश में ही मुंबई के कई इलाके जलमग्न हो गए। स्कूल से लौट रहे एक ११ वर्षीय बच्चे से लेकर बुजुर्गों तक कई लोग प्रशासनिक लापरवाही की कीमत चुकाने को मजबूर हुए। उधर, मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर लगभग १३.३ किलोमीटर लंबे ‘मिसिंग लिंक’ परियोजना का एक हिस्सा उद्घाटन के कुछ ही सप्ताह बाद पहले मानसून में क्षतिग्रस्त होने से निर्माण गुणवत्ता पर भी सवाल उठने लगे हैं। करोड़ों रुपये की लागतवाली इस परियोजना का पहली ही बारिश में प्रभावित होना सरकार के दावों पर प्रश्नचिह्न लगा रहा है।
टेंडर को लेकर दोनों में लड़ाई
राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि मुख्यमंत्री फडणवीस ने शिंदे के कार्यकाल में स्वीकृत कई टेंडरों को लागत बढ़ने का हवाला देते हुए निरस्त कर दोबारा प्रक्रिया शुरू कराई, जिससे दोनों दलों के बीच मतभेद और गहरे हो गए। माना जा रहा है कि मुंबई महानगरपालिका पर नियंत्रण को लेकर दोनों सहयोगी दलों के बीच अंदरूनी खींचतान भी तेज हो गई है। फिलहाल, मानसून ने इतना जरूर साफ कर दिया है कि विकास परियोजनाओं का श्रेय लेने वालों की कमी नहीं है, लेकिन शहर की बदहाली और उससे जुड़े सवालों की जिम्मेदारी लेने को कोई तैयार नहीं दिख रहा है।
वार-पलटवार
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का कहना है कि शहरी आधारभूत ढांचे से जुड़े विभागों की जिम्मेदारी एकनाथ शिंदे के पास है, इसलिए मुंबई की बदहाली के लिए उन्हें जवाब देना चाहिए।
वहीं, एकनाथ शिंदे का तर्क है कि मुंबई महानगरपालिका पर भाजपा का प्रभाव है, इसलिए जवाबदेही भी उसी की बनती है।
