सामना संवाददाता / मुंबई
कथित नीट-यूजी पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था की गड़बड़ियों के खिलाफ दिल्ली में चल रहे सीजेपी आंदोलन के समर्थन में मुंबई में हुए प्रदर्शनों पर पुलिस ने बड़ा शिकंजा कसा है। शहर के अलग-अलग पुलिस थानों में आठ एफआईआर दर्ज कर ९०० से अधिक लोगों को आरोपी बनाया गया है। पुलिस का आरोप है कि इन प्रदर्शनकारियों ने बिना अनुमति सभाएं कीं और कानून-व्यवस्था संबंधी आदेशों का उल्लंघन किया।
प्रदर्शन दादर, शिवाजी पार्क, चैत्यभूमि और दक्षिण मुंबई समेत कई स्थानों पर हुए थे। छात्र संगठनों का आरोप है कि पुलिस ने आंदोलन शुरू होने से पहले ही कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया और बाद में बड़ी संख्या में युवाओं को व्हॉट्सऐप पर नोटिस भेजकर पूछताछ के लिए बुलाया। पुलिस के अनुसार, ये नोटिस भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा ३५(३) के तहत जारी किए गए हैं। कुछ रिपोर्टों में करीब ७० लोगों को हिरासत में रखे जाने और पुलिस द्वारा आंदोलन के पीछे कथित बड़ी साजिश की जांच किए जाने का दावा भी किया गया है।
सवाल यह है कि लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़े परीक्षा घोटाले की जिम्मेदारी तय करने के बजाय क्या सरकार मुकदमों का डर दिखाकर युवाओं की आवाज दबाना चाहती है। आठ एफआईआर और ९०० आरोपी यह संकेत देते हैं कि अब परीक्षा विवाद केवल शिक्षा का नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों का भी बड़ा सवाल बन चुका है।
आंदोलनकारियों पर पुलिस का शिकंजा
नीट परीक्षा विवाद को लेकर मुंबई में हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद पुलिस ने आठ एफआईआर दर्ज की हैं। दादर, शिवाजी पार्क और दक्षिण मुंबई में हुए आंदोलनों में शामिल ९०० से ज्यादा लोगों पर कार्रवाई की गई। छात्र संगठनों ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताया है।
