-खड़गे, प्रियंका गांधी, अखिलेश यादव, कर्नाटक व केरल के सीएम भी हिरासत में लिए गए
सामना संवाददाता / नई दिल्ली
नीट पेपर लीक और छात्र आंदोलन के समर्थन में प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरने पर बैठे विपक्षी नेताओं पर पुलिस कार्रवाई के बाद सियासी घमासान तेज हो गया। राहुल गांधी समेत कई नेताओं को हिरासत में लिए जाने पर विपक्ष ने केंद्र सरकार पर लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन और `तानाशाही रवैया’ अपनाने का आरोप लगाते हुए तीखा हमला बोला। विपक्ष का आरोप है कि धरने पर बैठे राहुल गांधी को पुलिस घसीटते हुए ले गई। राहुल गांधी के अलावा कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, प्रियंका गांधी, अखिलेश यादव को भी हिरासत में लिया गया। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार, केरल मुख्यमंत्री वीडी सतीशन भी हिरासत में लिए गए।
प्रदर्शनकारी पीएम मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। इस दौरान राहुल गांधी को हटाने के प्रयास में पुलिस और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच तीखी नोक-झोंक और धक्का-मुक्की भी हुई।
`सबसे बड़े युवा विरोधी हैं पीएम मोदी’ -राहुल गांधी
लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने दिल्ली में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस के बल प्रयोग की निंदा करते हुए आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इतिहास के सबसे बड़े युवा-विरोधी प्रधानमंत्री हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वे इतने युवा विरोधी हैं कि एक नाकाम शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा भी नहीं ले सकते। सोमवार को सरकार और दिल्ली पुलिस ने जो किया वो शर्मनाक है। छात्रों को लाठी से पीटना और आंसू गैस के गोले छोड़ना लोकतांत्रिक नहीं है।
-राहुल गांधी की नाक से बहता दिखा खून
-पीएम आवास के बाहर पुलिस से धक्का-मुक्की में चोटिल
पीएम आवास के बाहर धरने पर बैठे राहुल गांधी को पुलिस ने हिरासत में लिया है। इस दौरान उनकी नाक से खून बहता नजर आ रहा है। आरोप है कि हिरासत में लिए जाने के दौरान राहुल गांधी की नाक में चोट लगी है। वहीं, नेता प्रतिपक्ष के सीने पर भी चोट लगने की बात कही जा रही है।
`भाजपा सरकार में अत्याचार चरम पर’
सपा अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा सरकार में अन्याय, अत्याचार चरम पर है। सरकार छात्रों-नौजवानों पर लाठियां चला रही है।
`सरकार ने अंग्रेजों को भी पीछे छोड़ दिया’
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने सोमवार की हिंसा को लेकर केंद्र सरकार को घेरा और कहा कि बर्बरता के मामले में सरकार ने अंग्रेजों को भी पीछे छोड़ दिया।
