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आतंकवादी हैं ये ‘कॉकरोच’!

-भाजपाई विधायक के बयान का सीएम ने किया समर्थन
-बोले जरूरी था इन लोगों पर लाठीचार्ज करना

सामना संवाददाता / मुंबई

नीट पेपर लीक मामले को लेकर दिल्ली में चल रहे छात्र आंदोलन पर महाराष्ट्र की सियासत अब बेहद आक्रमक हो गई है। सत्तारूढ़ खेमे के विधायक सदाभाऊ खोत द्वारा इंडिया गठबंधन, महाविकास आघाड़ी और आंदोलन कर रहे छात्रों की तुलना आतंकवादियों से किए जाने के बाद राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। खोत ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का विरोध करते हुए कहा कि प्रधान का इस्तीफा बिल्कुल नहीं होगा। आश्चर्य तो यह है कि राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उनके बयान को समर्थन देते हुए कहा कि छात्रों पर यह कार्रवाई जरूरी थी, अन्यथा कोई अनहोनी हो सकती थी। उनके इस बयान से विपक्ष और भड़क गया है।
सदाभाऊ खोत ने आरोप लगाया कि नीट पेपर लीक मामले को लेकर महाविकास आघाड़ी राज्य में अशांति पैदा करने का प्रयास कर रही है। इनके समर्थन में जो छात्र आंदोलन कर रहे हैं, उसका मतलब ‘कॉकरोच’ की तुलना आतंकवादी से करते हुए उन पर और सख्त कार्रवाई की पैरवी की है। कहा कि ये लोग देश में आतंकवाद जैसी स्थिति पैदा करना चाहती है। खोत ने कहा कि सरकार को ऐसे लोगों को लोकतांत्रिक तरीके से जवाब देना चाहिए और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। उनके इस बयान के बाद विपक्ष ने उन पर तीखा हमला बोला है। इसी बीच सत्तारूढ़ खेमे से मुख्यमंत्री फडणवीस की ओर से यह तर्क सामने आया है कि दिल्ली में जिस तरह आंदोलन बढ़ रहा था, उसे नियंत्रित करने के लिए पुलिस कार्रवाई जरूरी थी। फडणवीस द्वारा कथित तौर पर खोत के बयान का समर्थन किए जाने के बाद विवाद और गहरा गया है।
सदाभाऊ खोत के बयान में इस्तेमाल की गई ‘आतंकवादी’ जैसी भाषा ने इस राजनीतिक टकराव को और हवा दे दी है। अब विपक्ष सरकार से सवाल कर रहा है कि क्या छात्रों की आवाज उठाने वालों को आतंकवादी बताना और उनके खिलाफ लाठीचार्ज को सही ठहराना ही लोकतांत्रिक शासन की नई परिभाषा है? विपक्ष का कहना है कि सरकार को छात्रों और युवाओं की समस्याएं सुननी चाहिए थी, न कि उनके आंदोलन को दबाने के लिए पुलिस बल का इस्तेमाल करना चाहिए था।
सत्ता का अहंकार है -अंजलि दमानिया
सामाजिक कार्यकर्ता अंजलि दमानिया ने सदाभाऊ खोत के बयान की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि खोत का पूरा राजनीतिक जीवन कथित तौर पर किसान आंदोलनों से जुड़ा रहा है, लेकिन सत्ता में आने के बाद उनके रवैये में बदलाव दिखाई दे रहा है। दमानिया ने कटाक्ष करते हुए कहा कि सत्ता मिलने के बाद व्यक्ति किस तरह बदल सकता है और सत्ता का अहंकार किस तरह दिखाई दे सकता है, यह सदाभाऊ खोत के बयान से स्पष्ट होता है। उन्होंने यह भी कहा कि जिस व्यक्ति को शिक्षा और आंदोलन के वास्तविक अर्थ की समझ नहीं है, उसकी ऐसी प्रतिक्रिया को गंभीरता से लेने की आवश्यकता नहीं है।

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