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वाह रे सरकार…! छात्रों को न्याय देने के बजाय फर्जी केस में फंसाने की धमकी?

-‘जेब में ५० ग्राम पाउडर डाल दूंगा, ड्रग्स केस में फंसा दूंगा’

-पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों को पुलिसकर्मी की कथित धमकी

-वीडियो वायरल, सरकार और पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल

सामना संवाददाता / मुंबई
नीट पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ मुंबई में आंदोलन कर रहे छात्रों के साथ पुलिस के कथित दुर्व्यवहार का एक चौंकानेवाला वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में पुलिस वाहन के भीतर एक पुलिसकर्मी आंदोलनकारी छात्रों को कथित तौर पर धमकी देता सुनाई दे रहा है कि यदि वे दोबारा आंदोलन करते दिखाई दिए तो उनकी जेब में ड्रग्स रखकर उन्हें मादक पदार्थों के झूठे मामले में फंसा दिया जाएगा।
वीडियो में पुलिसकर्मी कथित तौर पर छात्रों से कहता सुनाई दे रहा है, ‘फिर मेरे जैसा कोई बेकार आदमी नहीं… वापस इधर कहीं मिला तो ५०-५० ग्राम पाउडर जेब में डाल दूंगा, फिर गया तू… जमानत!’ पुलिसकर्मी के इस कथित बयान ने मुंबई पुलिस की कार्यप्रणाली और कानून के राज को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
वीडियो वायरल होने के बाद मामला तूल पकड़ गया। मुंबई पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित पुलिसकर्मी को वर्तमान तैनाती से हटा दिया है तथा पूरे घटनाक्रम की जांच के आदेश दिए हैं। अब सवाल यह उठ रहा है कि छात्रों को कथित तौर पर धमकी देनेवाले पुलिसकर्मी के खिलाफ आगे क्या कार्रवाई होगी और क्या जांच में सामने आनेवाले तथ्यों के आधार पर उसकी जवाबदेही तय की जाएगी।
विपक्ष का कहना है कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। यदि किसी पुलिसकर्मी द्वारा प्रदर्शनकारी छात्रों को झूठे मुकदमे में फंसाने की कथित धमकी दी जाती है तो यह केवल पुलिस की कार्यप्रणाली पर ही नहीं, बल्कि सरकार की जवाबदेही पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।
‘क्या छात्रों का भविष्य डराकर कुचलना चाहती है सरकार?’
जिन छात्रों के भविष्य से जुड़े सवालों का जवाब सरकार को देना चाहिए कि क्या उनकी आवाज डराकर और कथित झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकी देकर दबाई जाएगी। देश का युवा पहले ही पेपर लीक, बेरोजगारी और भर्ती प्रक्रियाओं में देरी जैसे मुद्दों को लेकर गहरे असंतोष में है। ऐसे में यदि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों को कथित तौर पर झूठे आपराधिक मामलों में फंसाने की धमकी दी जाती है तो यह लोकतांत्रिक मूल्यों और कानून के राज दोनों के लिए बेहद चिंताजनक संकेत माना जाएगा।

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