-मनपा और म्हाडा की जमीन निजी संस्था को सौंपने के पैâसले पर उठे गंभीर सवाल
सामना संवाददाता / मुंबई
मुंबई की सार्वजनिक जमीनों और खेल परिसरों को निजी संस्था के हवाले करने के प्रस्ताव ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। सूचना के अधिकार कार्यकर्ता अनिल गलगली ने मनपा और म्हाडा की भूमि एक ही निजी संस्था श्री विलेपार्ले केलवाणी मंडल को सौंपने के प्रस्ताव का कड़ा विरोध करते हुए इसे जनहित और सार्वजनिक संपत्ति के संरक्षण के विरुद्ध बताया है। गलगली ने मुख्यमंत्री, संबंधित मंत्रियों, बीएमसी और म्हाडा को भेजी आपत्ति में कहा है कि डी.एन. नगर, अंधेरी (पश्चिम) स्थित मनोरंजन मैदान के लिए आरक्षित भूखंड, जेवीपीडी योजना के लोकमान्य तिलक उद्यान का मैदान तथा छत्रपति शिवाजी महाराज क्रीड़ा संकुल के संचालन और रखरखाव का प्रस्ताव एक ही संस्था को देना निर्णय प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
उनका कहना है कि सार्वजनिक मैदान, उद्यान और खेल परिसर किसी एक संस्था की संपत्ति नहीं, बल्कि मुंबईकरों की साझा धरोहर हैं। यदि इनका संचालन निजी हाथों में गया तो आम नागरिकों की पहुंच और उपयोग पर भविष्य में प्रतिबंध लगने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। गलगली ने यह भी सवाल उठाया कि जब मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस सार्वजनिक खुली जगहों का रखरखाव स्थानीय स्वशासी संस्थाओं द्वारा किए जाने की बात कह चुके हैं, तब ऐसे प्रस्ताव क्यों लाए जा रहे हैं। उन्होंने मुंबई भाजपा अध्यक्ष अमित साटम सहित कई जनप्रतिनिधियों द्वारा भी इस निर्णय पर जताए गए विरोध का उल्लेख किया।
उन्होंने मांग की है कि दोनों प्रस्ताव तत्काल स्थगित किए जाएं, निर्णय से जुड़े सभी दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं तथा मुंबई के मैदान, उद्यान और खेल परिसरों का संचालन बीएमसी के माध्यम से ही जारी रखा जाए, ताकि वे सभी नागरिकों के लिए बिना किसी भेदभाव के उपलब्ध रहें।
