सामना संवाददाता / मुंबई
दिल्ली में शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहे छात्रों और युवाओं पर निर्दयता से लाठीचार्ज किया गया। छात्रों के सिर फोड़ दिए गए। सरकार आंदोलन को कुचलने की हरसंभव कोशिश कर रही है, लेकिन छात्र अपनी मांगों पर अडिग हैं। यह आंदोलन अब घर-घर तक पहुंच गया है और लोगों के भीतर भी आक्रोश की आग भड़क उठी है। इसी गुस्से, आक्रोश और असंतोष को आवाज देने के लिए मुंबई में रविवार, २६ जुलाई को विशाल मोर्चा निकाला जाएगा। इसकी घोषणा कल शिवतीर्थ निवास पर शिवसेनापक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे और मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे ने संयुक्त प्रेस काॅन्फ्रेंस में की।
यह मार्च दादर स्थित छत्रपति शिवाजी महाराज पार्क में छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा से शुरू होकर प्रभादेवी स्थित श्री सिद्धिविनायक मंदिर तक निकाला जाएगा। इस अवसर पर सिद्धिविनायक मंदिर में प्रार्थना की जाएगी कि ‘या तो सरकार को सद्बुद्धि मिले या फिर सरकार के रूप में देश पर आया यह संकट जल्द से जल्द दूर हो।
मोर्चे में होगा सिर्फ तिरंगा
ठाकरे बंधुओं ने स्पष्ट किया कि इस मार्च में किसी भी राजनीतिक दल का झंडा नहीं होगा, केवल तिरंगा होगा। मार्च में छात्रों के साथ उनके माता-पिता भी बड़ी संख्या में शामिल हों, ऐसी अपील उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने की। इस अवसर पर शिवसेना नेता, युवासेनाप्रमुख व विधायक आदित्य ठाकरे, मनसे नेता अमित ठाकरे और बाला नांदगांवकर भी उपस्थित थे। संयुक्त प्रेस काॅन्फ्रेंस में राज ठाकरे ने कहा कि नीट परीक्षा के पेपर लीक होने का यह पहला मामला नहीं है। यह तीसरी बार है जब नीट परीक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। जब नीट परीक्षा की शुरुआत की गई थी, तभी हमने इसका विरोध किया था। हमने कहा था कि इस तरह की केंद्रीयकृत व्यवस्था के तहत परीक्षा आयोजित नहीं की जानी चाहिए, लेकिन सत्ता के अहंकार में सरकार ने किसी की बात सुनने की कोशिश नहीं की और आज भी स्थिति वही है।
उन्होंने कहा कि आंदोलन की शुरुआत छात्रों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग से की थी, लेकिन जिस तरह छात्रों पर लाठीचार्ज किया गया और उनके साथ मारपीट हुई, उसके बाद यह मामला अब केवल धर्मेंद्र प्रधान तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि प्रधानमंत्री तक पहुंच गया है।
यह सरकार अब किसी को
अपनी नहीं लगती – उद्धव ठाकरे
ये वही छात्र थे, वही युवा थे, जिन्होंने अच्छे दिन आने की उम्मीद में इस सरकार को चुनकर दिया था। लेकिन आज यह सरकार उन्हीं के साथ बेरहमी से पेश आ रही है। यह सरकार अब किसी को अपनी नहीं लगती। अब बात सिर्फ धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक सीमित नहीं है, बल्कि इन बच्चों को अब सरकार ही नहीं चाहिए,’ ऐसा तीखा हमला शिवसेनापक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे ने किया।
मामला अब धर्मेंद्र प्रधान और प्रधानमंत्री से
भी आगे निकल गया है -राज ठाकरे
मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे ने कहा कि जिस तरह किसान आत्महत्या कर रहे हैं, उसी तरह एक दिन छात्र भी आत्महत्या करने लगेंगे, ऐसी आशंका उन्होंने पहले ही जताई थी और आज वही स्थिति सामने आ रही है। इसी पीड़ा और आक्रोश से यह आंदोलन खड़ा हुआ है।
मुंबई में भी छात्रों के माता-पिता
व्यक्त कर रहे है आक्रोश
केंद्र सरकार तक पहुंचनी चाहिए
अभिभावकों की आवाज –राज ठाकरे
नीट परीक्षा के छात्रों के माता-पिताओं को भी यह सब देखकर पीड़ा हो रही है। जिन बच्चों ने बड़ी उम्मीदों के साथ सड़कों पर उतरकर आंदोलन शुरू किया है, उन्होंने कहा कि दिल्ली की तरह मुंबई में भी छात्र और उनके माता-पिता एकजुट होकर अपना गुस्सा और आक्रोश व्यक्त कर रहे हैं। यह बात केंद्र सरकार तक पहुंचना बेहद जरूरी है। छात्रों और अभिभावकों की आवाज केंद्र तक पहुंचनी चाहिए और इसी उद्देश्य से २६ जुलाई को यह मार्च निकाला जा रहा है।
राज ठाकरे ने कहा कि यह मुद्दा वोट बैंक का नहीं है, न ही चुनाव का है। यह छात्रों के न्याय का सवाल है। छात्र आत्महत्या कर रहे हैं। यह कितना गंभीर विषय है! जिस तरह से सत्ता चलाई जा रही है, उसके खिलाफ यह जनता का आक्रोश है। यह गुस्सा अब देश के अलग-अलग राज्यों से भी सामने आ रहा है।
‘आर. आर. पाटील का पद
एक बयान की वजह से गया था’
राज ठाकरे ने कहा कि जब भाजपा विपक्ष में थी, तब उसने कई मंत्रियों के इस्तीफे की मांग की थी। जब मैंने रजा अकादमी के खिलाफ मार्च निकाला था। उस समय अरूप पटनायक मुंबई के पुलिस आयुक्त थे और राज्य में कांग्रेस की सरकार थी। सरकार ने अरूप पटनायक को उनके पद से हटा दिया था। उन्होंने कहा कि मुंबई में जब २६/११ का आतंकवादी हमला हुआ था, तब तत्कालीन गृह मंत्री आर. आर. पाटील ने कहा था, ‘बड़े-बड़े शहरों में छोटी-छोटी बातें होती रहती हैं…’ उनके इसी एक बयान के बाद उन्हें गृह मंत्री के पद से हटा दिया गया था।
‘क्या पुलिस ड्रग्स सप्लायर है?’
आंदोलनकारी छात्रों को एक पुलिसकर्मी द्वारा कथित तौर पर धमकी दिए जानेवाले वायरल वीडियो पर राज ठाकरे ने तीखी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि क्या अब पुलिस के पास पाउडर भी आसानी से उपलब्ध होने लगा है, जो पुलिसकर्मी यह धमकी दे रहा है, क्या वह ड्रग्स सप्लायर है? आखिर यह सब चल क्या रहा है?’
‘सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश कहते हैं कि आंदोलन का फुटेज देखने का समय नहीं’
राज ठाकरे ने कहा, ‘सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश कहते हैं कि उनके पास आंदोलन का फुटेज देखने का समय नहीं है। लेकिन मूल रूप से यह पूरा मामला उन्हीं की वजह से तो खड़ा हुआ है! इन झगड़ों के जन्मदाता वही हैं। जब किसी विवाद को जन्म दिया गया है तो क्या उसके बाद उस स्थिति को देखने और समझने की जिम्मेदारी नहीं होनी चाहिए?
‘सत्ता का यह अहंकार आखिर किसलिए?’
राज ठाकरे ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सत्ता का यह अहंकार आखिर किसलिए है। यही स्थिति किसानों के आंदोलन के दौरान भी देखने को मिली थी। उस समय भी प्रधानमंत्री किसानों से मिलने के लिए तैयार नहीं थे और आंदोलन को दबाने की कोशिश की गई थी। राज ठाकरे ने सवाल किया, ‘यह वैâसी सत्ता है और सत्ता का यह अहंकार किस बात का है? ये बच्चे आखिर क्या मांग रहे थे? नीट की परीक्षा देने के लिए बच्चों को कितनी मेहनत करनी पड़ती है और उन्हें कितनी परेशानियों से गुजरना पड़ता है, यह एक बार उन बच्चों से जाकर पूछिए।’
‘एक-एक को पीटकर भगा देंगे!’
राज ठाकरे ने कहा कि यह मार्च पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से निकाला जाएगा। यदि गुंडे भेजकर दिल्ली जैसी स्थिति पैदा करने की कोशिश की गई या आंदोलन में गुंडों को घुसाने का प्रयास किया गया, तो हमारे लोग उन्हें नहीं छोड़ेंगे। एक-एक को पीटकर भगा देंगे, ऐसी चेतावनी राज ठाकरे ने दी। जब उनसे पूछा गया कि देवेंद्र फडणवीस और जे. पी. नड्डा ने आरोप लगाया है कि विपक्षी दल छात्रों के कंधे पर बंदूक रखकर राजनीति कर रहे हैं तो राज ठाकरे ने पलटवार करते हुए पूछा, ‘भारतीय जनता पार्टी अब तक क्या करती आई है?’
शरद पवार… जंतर-मंतर और मोदी से मुलाकात
जब पत्रकारों ने राज ठाकरे से पूछा कि शरद पवार ने कल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की है तो उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा, ‘इसी को जंतर-मंतर कहते हैं।’
राज ठाकरे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ट्वीट पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने आज ट्वीट किया, लेकिन उस ट्वीट का कोई अर्थ नहीं है। यदि सरकार ने समय रहते इन छात्रों को बातचीत के लिए बुलाया होता और उनकी समस्याओं को गंभीरता से समझने की कोशिश की होती तो स्थिति इतनी गंभीर होती ही नहीं होती।
